WWF ने लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2018 जारी की

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वर्ल्ड वाइड फण्ड फॉर नेचर (WWF) द्वारा हाल ही में लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2018 जारी की गई है। लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2018 दुनिया के वन्यजीवन, जंगलों, महासागरों, नदियों और जलवायु पर मनुष्यों के प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करता है, और महत्वपूर्ण सेवा प्रकृति के लिए प्रभाव प्रदान करता है। 80 पृष्ठों की इस रिपोर्ट को 59 शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है।

मुख्य बिंदु:

  • 1970 से 2014 तक मछली, पक्षियों, स्तनधारियों, उभयचर और सरीसृपों की आबादी में औसतन 60% की कमी हुई है और इसी अवधि में ताज़े पानी में रहने वाली प्रजातियों की आबादी में 83% की कमी आई है।
  • 1960 से अब तक वैश्विक पारिस्थितिकीय पदचिह्न (footprint) में 190% से अधिक की वृद्धि हुई है।
  • वैश्विक स्तर पर 1970 से अब तक आर्द्रभूमि की सीमा में 87% की कमी हुई है।
  • WWF ने अपनी रिपोर्ट में यह भी शामिल किया कि जैव विविधता में हानि के दो प्रमुख कारक प्राकृतिक संसाधनों और कृषि का अधिक शोषण थे।
  • WWF के अनुसार, भारत की उच्च आबादी ने इसे पारिस्थितिक संकट के प्रति संवेदनशील बना दिया है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की यह रिपोर्ट वन्यप्राणी जीवन, समुद्री जीवन, झीलों तथा पर्यावरण पर व्यक्तिगत कार्यकलापों के प्रभाव को दर्शाती है। इस रिपोर्ट में एक नया खंड शामिल किया गया है जिसे मृदा जैव विविधता का नाम दिया गया है। इसमें कहा गया है कि वेटलैंड्स का समाप्त होना भारत के लिये गंभीर चिंता का विषय है। इस रिपोर्ट में वन्य जीव जन्तुओं के लिए उनके प्राकृतिक आवास का समाप्त होना, संसाधनों का अत्यधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन, आदि से होने वाले खतरों को भी शामिल किया गया है। उपरोक्त चुनौतियों का समाधान करने के लिये, WWF ने तीन आवश्यक उपाय भी सुझाए हैं:

  1. जैव विविधता की पुनः प्राप्ति के लिये स्पष्ट रूप से एक लक्ष्य निर्दिष्ट करना।
  2. प्रगति के मापनीय और प्रासंगिक संकेतकों का एक सेट विकसित करना।
  3. उन कार्यों के एक समूह पर सहमति, जो सामूहिक रूप से आवश्यक समयसीमा में लक्ष्य प्राप्त कर सकें।