WPI आधारित मुद्रास्फीति 4 वर्षों के उच्चतम स्तर पर

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थोक मूल्‍य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्‍फीति की वार्षिक दर जून, 2018 के दौरान (जून, 2017 की तुलना में) 5.77 % रही, जबकि मई 2018 में यह 4.43 प्रतिशत थी। दिसंबर 2013 के बाद यह सर्वोच्च थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति है। यह वृद्धि बड़े पैमाने पर बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति के साथ-साथ ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।

थोक मूल्य सूचकांक:

  • थोक मूल्य सूचकांक (WPI) लेन-देन के शुरुआती चरण में थोक बिक्री के लिये वस्तुओं की कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है।
  • WPI बास्केट में सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता है।
  • भारत में WPI को हेडलाइन मुद्रास्फीति दर के रूप में भी जाना जाता है।
  • भारत में WPI की गणना आर्थिक सलाहकार कार्यालय (Office of Economic Advisor -OEA), औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा की जाती है।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे अन्य समष्टिगत आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष के साथ इसे संरेखित करने के लिये मई 2017 में अखिल भारतीय WPI का आधार वर्ष 2004-05 से बदलकर 2011-12 किया गया है।
  • वित्तीय नीति के प्रभाव को दूर करने के लिये थोक मूल्य सूचकांक की नई परिभाषा में कर को शामिल नहीं किया गया है।
  • डॉ. सौमित्र चौधरी की अध्यक्षता में वर्किंग ग्रुप की ओर से आधार वर्ष में बदलाव की सिफारिश की गई थी।