SC समिति ने यौन शोषण के आरोप में मुख्य न्यायधीश को क्लीन चिट दी

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सर्वोच्च न्यायालय समिति ने यौन शोषण के आरोप में मुख्य न्यायधीश को क्लीन चिट दे दी है। समिति के अनुसार महिला द्वारा मुख्य न्यायधीश पर लगाए गये आरोप निराधार हैं, इनमे सच्चाई नहीं है।

23 अप्रैल, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के विरुद्ध यौन शोषण के मामले की जांच के लिए पैनल का गठन किया था। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एस. ऐ. बोबडे कर रहे हैं। इस जांच पैनल में जस्टिस इंदु मल्होत्रा तथा जस्टिस इंदिरा बनर्जी भी शामिल थे। पहले इस पैनल में एन.वी. रमण भी शामिल थे, बाद में उन्होंने स्वयं को इस पैनल से अलग कर लिया था। दरअसल हाल ही में पीड़िता ने जांच पैनल को पत्र लिख कर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा था कि जस्टिस रमण मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की करीबी मित्र हैं इसलिए उन्हें जांच पैनल से हटाया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर 35 वर्षीय महिला ने यौन शोषण के आरोप लगाये थे, मुख्य न्यायधीश के विरुद्ध यौन शोषण के इस मामले के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल, 2019 को विशेष बेंच का गठन किया था, इस बेंच में रंजन गोगोई, अरुण मिश्र तथा संजीव खन्ना शामिल थे।

इस बेंच ने महिला द्वारा लगाए गये आरोपों को गलत करार दिया और आरोपों को निराधार बताया। इस दौरान पीठ ने कहा कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नष्ट करने का प्रयास है।

19 अप्रैल, 2019 को मुख्य न्यायधीश के आवासीय कार्यालय में कार्य करने वाली कनिष्ठ न्यायालय सहायक ने सर्वोच्च न्यायालय के 22 न्यायधीशों को पत्र लिखकर मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

जस्टिस रंजन गोगोई:

जस्टिस रंजन गोगोई का जन्म 18 नवम्बर, 1954 को हुआ था, वे असम के निवासी हैं। वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशब चन्द्र गोगोई के पुत्र हैं। उन्होंने आरम्भ में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में कार्य किया। फरवरी, 2001 में उन्हें उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया। सितम्बर, 2010 में उनका स्थानांतरण पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया जहाँ फरवरी, 2011 में उन्हें मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया। अप्रैल, 2012में उनकी नियुक्ति देश के सर्वोच्च न्यायालय में हुई थी।