SC ने भारतीय पक्षियों की विलुप्ति की रोकथाम हेतु पैनल का गठन किया

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दो भारतीय पक्षियों ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लेसर फ्लोरिकन के खतरनाक विलुप्त होने को गंभीरता से लेते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मॉनसून और प्रजनन के मौसम को देखते हुए, इन प्रजातियों की सुरक्षा के लिए एक तत्काल संचालन समिति का गठन करने और एक आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना लागू करने के लिए एक उच्चाधिकार समिति का गठन किया है।

मुख्य बिंदु:

  • शीर्ष अदालत ने 3 सदस्य पैनल का गठन किया।
  • दीपक आप्टे जो बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के निदेशक हैं, इस पैनल के पहले सदस्य हैं।
  • असद आर रहमानी, पैनल के दुसरे सदस्य बीएनएचएस के पूर्व निदेशक और वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया के शासी निकाय के सदस्य हैं।
  • धनंजय मोहन जो उत्तराखंड के मुख्य वन संरक्षक हैं, इस समिति के तीसरे सदस्य हैं।
  • सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्र के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकारों से भी जवाब मांगा है जहां पक्षियों की ये दो प्रजातियां प्रमुखता से पाई जाती हैं।
  • वन्यजीव कार्यकर्ताओं की एक दलील ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की जनसंख्या में 82% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। यह 1969 में अनुमानित 1260 से गिरकर 2018 में 100-150 तक पहुंच गया।
  • पिछले कुछ दशकों में, लेसर फ्लोरिकन (जिसे लीश या खरमोर के नाम से भी जाना जाता है) की जनसंख्या में 80% की भारी गिरावट देखी गई, जो 1999 में दर्ज 3530 पक्षियों में 2018 में 700 से कम थी।

दो लुप्तप्राय पक्षियों के लिए खतरे में के कारणों में शामिल हैं- बिजली की खंभों और पवन टरबाइनों के साथ टकराव से मौत, शिकार, घास के मैदानों की कमी, खदानों का विकास और इनके आवास के आस-पास मानव आवास और कीटनाशकों का अंतर्ग्रहण।

आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना: इस योजना के तहत, वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने कुछ निश्चित कदम सुझाए हैं। जैसे कि:

  • पॉवरलाइन और पवन चक्की  का तत्काल विघटन और भूमिगतकरण
  • किसी भी आगामी पवन, सौर ऊर्जा परियोजनाओं, और महत्वपूर्ण आवासों में और आसपास के बिजलीघर पर तत्काल घेराबंदी 
  • पक्षियों के अर्ध-महत्वपूर्ण आवासों में पावरलाइन पर डायवर्टर की स्थापना की जाए।
  • आक्रमणकारी मानव गतिविधियों के साथ-साथ शिकारियों से दोनों प्रजातियों के प्रजनन आधार की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण आवासों में शिकारी रोधक बाड़ लगाने की तत्काल स्थापना करनी चाहिए।