RBI ने देना बैंक पर ऋण जारी करने और नौकरियां देने पर रोक लगाई

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी मात्रा में कर्ज में डूबे सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक पर नया ऋण और नई नौकरियां देने पर रोक लगाने का निर्देश दिया। आरबीआई द्वारा यह निर्णय ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ के तहत लिया गया। रिजर्व बैंक इससे पहले इलाहाबाद बैंक, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक के खिलाफ यह कार्रवाई शुरू कर चुका है।

अधिक एनपीए (Non Performing Asset) के चलते मार्च तिमाही में देना बैंक का घाटा बढ़कर 1,225.42 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2016-17 की जनवरी-मार्च तिमाही में उसका शुद्ध घाटा 575.26 करोड़ रुपये था। इससे पहले 2017-18 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बैंक का घाटा 380.07 करोड़ रुपये था।

रिज़र्व बैंक द्वारा देना बैंक को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के कारण खराब वित्तीय स्वास्थ्य को देखते हुए ताजा क्रेडिट बढ़ाने से रोका गया। यह देना बैंक को पीसीए ढांचे के तहत उधार देने पर प्रतिबंध लगाता है। इसका अर्थ है कि बैंक पहले से स्वीकृत क्रेडिट सुविधाओं के लिए ऋण तो बांट सकता है, लेकिन ताजा ऋण स्वीकृत नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त भारतीय रिज़र्व बैंक ने देना बैंक में अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर भी रोक लगा दी है। यदि बैंक एनपीए में सुधार करता है और खराब ऋण के अनुपात को कम करता है तो आरबीआई इन प्रतिबंधों को हटा सकता है। आरबीआई द्वारा जिस प्रकार कुछ बैंकों पर इस प्रकार के प्रतिबन्ध लगाए गये हैं उससे देश में नैरो बैंकिंग (Narrow Banking) की शुरुआत हो सकती है।

नैरो बैंकिंग के तहत बैंकों को सरकारी बॉन्ड रखने के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है तथा ऋण अन्य वित्तीय मध्यस्थों द्वारा दिए जाने की व्यवस्था की जा सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बनाई गई एस.एस. तारापोर समिति ने सुझाव दिया था कि देश के आर्थिक रूप से कमज़ोर बैंकों को नैरो बैंक बना दिया जाना चाहिए।