RBI ने की डिजिटल पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (PCR) की स्थापना

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में डिजिटल पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री की शुरुआत कर दी है, इसके द्वारा ऋण लेने वाले लोगों तथा कॉर्पोरेट्स की जानकारी को एकत्रित किया जा सकता है।

  • PCR ऋण लेने वालों की प्रमाणिक डिजिटल रजिस्ट्री है, यह वित्तीय सूचना अधोसंरचना के रूप में कार्य करेगा। इससे ऋण सूचना प्रणाली मज़बूत होगी। 
  • यह ऋण राशि या उधारकर्ता के प्रकार में किसी भी सीमा के बावजूद, प्रत्येक ऋण के लिए सभी भौतिक घटनाओं के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग के एक बिंदु के रूप में कार्य करना चाहता है।
  • PCR उधारकर्ताओं के सभी विवरणों को कैप्चर करेगा, जिसमें विलुप्त डिफॉल्टर्स और वित्तीय अपराधों की जांच के लिए कानूनी सूट लंबित भी होंगे।
  • इसमें बैंक नियामक सेबी, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, सामान और सेवा कर नेटवर्क (GSTN) और दिवालियापन और दिवालियापन बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) जैसी संस्थाओं से डेटा भी शामिल होगा ताकि बैंक और वित्तीय संस्थानों को मौजूदा और संभावित उधारकर्ताओं की 360 डिग्री प्रोफ़ाइल प्राप्त हो सके।

इस सम्बन्ध में RBI ने एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट पर पिछले तीन साल से 100 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों को निमंत्रण भेजा है। देश में बढ़ते हुए NPA के मध्यनज़र यह एक आवश्यक कदम है। भारतीय बैंकिंग प्रणाली में NPA लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है।

पृष्ठभूमि:

जून, 2018 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री की स्थापना की थी। इसका उद्देश ऋण तक पहुँच को आसान बनाना तथा भारत की साख व्यवस्था को मज़बूत बनाना है। इस फैसले का निर्णय वाई. एम. देवस्थली समिति की अनुशंसा पर किया गया था। वर्तमान में भारत में कई क्रेडिट रिपॉजिटरी हैं, परन्तु उनका उद्देश्य तथा कवरेज भिन्न-भिन्न है।