DRDO ने एचएसटीडीव्ही वाहन का सफल परिक्षण किया

0
17

12 जून को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा में बालासोर तट के निकट एक बेस से हाइपरसोनिक गति से उड़ान के लिये देश में विकसित  Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle (HSTDV) का पहला सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण 20 सेकंड से भी कम समय का था। इसमें सफलता मिल जाने के बाद भारत चीन, अमेरिका और रूस जैसी तकनीक हासिल करने वाले देशों में शामिल हो जाएगा।

जो विमान 6126 से 12251 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ता है, उसे हाइपरसोनिक विमान कहते हैं। 

HSTDV:

  • उनका वजन 1-मीट्रिक टन तक है और लंबाई 5.6-मीटर (18-फीट) है।
  • यह वाहन निर्माणाधीन है जिसमें मध्य-शरीर के स्टब-विंग और रेक टेल फिन्स और 3.7-मीटर आयताकार सेक्शन एयर इनटेक के साथ एक चपटा अष्टकोणीय क्रॉस सेक्शन है।
  • स्क्रैमजेट इंजन एग्जॉस्ट नोजल के हिस्से के रूप में मिड-बॉडी के नीचे स्थित है। इसके शक्तिशाली इंजन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
  • अग्र-शरीर में दो समानांतर बाड़ स्पिलेज को कम करने और जोर बढ़ाने के लिए हैं।
  • रोल कंट्रोल के लिए पंखों के पीछे किनारे पर पार्ट स्पैप फ्लैप्स दिए गए हैं।
  • दहन के अंत में डिफ्लेबल नोजल काउल पावर-ऑफ और पावर-ऑन चरणों के दौरान संतोषजनक प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए 25 डिग्री तक का विक्षेपण कर सकता है।
  • इसका उपयोग मिसाइल और सैटेलाइट लॉन्च करने के लिये किया सकता है।

स्क्रैम-जेट तकनीक:

स्क्रैम-जेट तकनीक में, ईंधन के दहन को एक कक्ष में सुपरसोनिक गति से मिसाइल में रखा जाता है, जबकि एक रैम जेट प्रणाली में, सिस्टम वायु को इकट्ठा करता है जो उप-गति पर उड़ान के दौरान वायुमंडल से जरूरत होती है और दहन कक्ष में प्रणोदक जलते हैं।