5G संचालन समिति ने दूरसंचार विभाग को सौंपी स्पेक्ट्रम, नियामक नीति रिपोर्ट

0
163

स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए.जे. पॉलराज की अध्यक्षता में 5G संचालन समिति ने दूरसंचार विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस समिति ने भारत में 5G शुरू करने के बारे में स्पेक्ट्रम नीति, नियामक नीति व मानक जैसे बिन्दुओं पर विस्तृत सिफारिशें दी हैं।

भारत में 5G शुरू करने के लिए रोडमैप के सम्बन्ध में सुझाव देने के लिए केंद्र सरकार ने सितम्बर, 2017 में इस समिति का गठन किया गया था। यह एक उच्च स्तरीय फोरम था, इसमें दूरसंचार, सूचना व प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान व तकनीक मंत्रालय के सचिव शामिल थे, इसके अलावा इसमें औद्योगिक प्रतिनिधि व शिक्षाविद भी शामिल थे। इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी की वायरलेस टेक्नोलॉजी के लिए वैश्विक मानक निर्धारित करना है।

शीघ्र 5G के क्रियान्वयन के लिए ए.जे. पॉलराज समिति ने मार्च, 2019 में नियामक लागू करने का सुझाव दिया है। वाणिज्यिक रूप से भारत में 5G की शुरुआत 2020 में होने की सम्भावना है। वैश्विक स्तर पर 5G टेक्नोलॉजी की शुरुआत 2019 में शुरू हो जायेगा। पूर्ण रूप से 5G 2024 तक शुरू हो पायेगा।

इस समिति ने भारत में उपयोग के आधार पर 5G को तीन चरणों में शुरू करने का सुझाव दिया है। 5G को शीघ्र शुरू करने से भारत को काफी लाभ हो सकता है और 5G एप्लीकेशन में भारत अग्रणी बन सकता है। 5G का आर्थिक प्रभाव 1 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक होगा। 5G ट्रायल के लिए आवश्यक उपकरण उत्पादित करने का कार्य नोकिया, एरिकसन, हुवावे और ZTE ने शुरू कर दिया है।

इस समिति ने आरम्भ में 5G क्रियान्वयन के सम्बन्ध में कुछ परेशानियों के बारे में रिपोर्ट में ज़िक्र किया है। आरम्भ में 5G उपकरणों के अधिक महंगा होने की सम्भावना है। इसके साथ ही इस समिति ने कहा कि 2जी, 3जी और 4जी अगले लगभग 10 वर्षों तक कार्य करते रहेंगे।

5G वायरलेस संचार टेक्नोलॉजी थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3GPP) पर आधारित है। यह 4G LTE के बाद मोबाइल नेटवर्क टेक्नोलॉजी का अगला चरण है। 5G टेक्नोलॉजी में डाउनलोड व अपलोड स्पीड मौजूदा 4G नेटवर्क से 100 गुना तेज़ होगी। इससे इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) को बढ़ावा मिलेगा।

दिसम्बर, 2017 में 3GPP ने 5G रेडियो मानक का पहला सेट पूरा किया था। 5G की तेज़ गति के कारण क्लाउड सिस्टम से संगीत आसानी से स्ट्रीम किया जा सकेगा, इससे बिना चालक वाले वाहन को आसानी से नेविगेशन डाटा उपलब्ध करवाया जा सकेगा। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के विकास में 5G की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी।