31 अक्टूबर: राष्ट्रीय एकता दिवस

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31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है। उनके जन्मदिन को ‘ऱाष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। देश में राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार करने के उद्देश्य से बीते 4 सालों से केन्द्र सरकार इस दिन ‘रन फॉर यूनिटी दौड़’ कार्यक्रम का आयोजन करती है। इस दिन सरदार वल्लभभाई पटेल के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावरण किया जा रहा है।

सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा को विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बताया गया है।

चीन स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के नाम अब तक सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ने अब चीन में स्थापित इस मूर्ति को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया है। न्यूयॉर्क की ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ की ऊंचाई भी सिर्फ 93 मीटर है।

मूर्ति बनाने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने दावा किया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है और महज 33 माह के रिकॉर्ड कम समय में बनकर तैयार हुई है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है और ऊंचाई 522 फिट यानी 182 मीटर है। प्रतिमा अपने आप में अनूठी है। इसके पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फीट और चेहरे की ऊंचाई 70 फीट है।

सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया। कंपनी के मुताबिक, कांसे की परत चढ़ाने के को छोड़ कर बाकी पूरा निर्माण देश में ही किया गया है। यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

वल्लभ भाई पटेल:

  • वल्लभभाई पटेल का जन्म गुजरात के करमसाड में 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था।
  • वे एक प्रसिद्ध बैरिस्टर थे, जिन्होंने लंदन में अध्ययन किया तथा गुजरात के गोधरा, बोरसाद और आनंद जैसे स्थानों पर अपनी वकालत की।
  • वे महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए तथा इसके बाद बड़े नेताओं की पंक्ति में अपना स्थान बनाया।
  • उन्होंने गुजरात में खेड़ा,बोरसाद और बारदोली में किसान आंदोलनों में नेतृत्व प्रदान किया।
  • वे ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन में साहस के साथ स्वयं को प्रस्तुत किया।
  • उन्हें भारत के बिस्मार्क और लौह पुरुष के रूप में भी जाना जाता है।
  • वे भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री थे।
  • उन्हें वर्ष 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।