24 मार्च: विश्व क्षय रोग दिवस

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प्रत्येक वर्ष टीबी अथवा क्षय रोग के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और इस वैश्विक महामारी को समाप्त करने के प्रयासों को बढ़ाने के लिए 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 1882 में क्षय रोग के बेसिलस की खोज करने वाले डॉ. रॉबर्ट कॉच के जन्म दिवस के उपलक्ष्य पर प्रति वर्ष ‘24 मार्च’ को मनाया जाता है। वर्ष 2018 के लिए विश्व क्षय रोग दिवस की थीम “वांटेड: लीडर्स फॉर अ टीबी फ्री वर्ल्ड” है।

दुनियाभर में बीमारियों से मौत के 10 शीर्ष कारणों में टीबी को प्रमुख बताया गया है। क्षय रोग या टी.बी एक संक्रामक बीमारी है, जिससे प्रति वर्ष लगभग 1.5 मिलियन लोग मौत का शिकार होते हैं। भारत को क्षयरोग से मुक्त बनाने के लिये भारत सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। विश्व ने 2030 तक टीबी से मुक्ति प्राप्ति का लक्ष्य रखा है वहीं अपने देश भारत में इसे 2025 तक खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

क्षय रोग:

क्षय रोग मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो कि मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है। इस रोग को ‘क्षय रोग’ या ‘राजयक्ष्मा’ के नाम से भी जाना जाता है। इससे बचाव अथवा इसकी रोकथाम संभव है। सामान्य तौर पर यह केवल फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है, परंतु यह मानव-शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है।

यह हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। विश्व की एक चौथाई जनसंख्या लेटेंट टीबी (latent TB) से ग्रस्त है। लेटेंट टीबी का अर्थ यह है कि लोग टीबी के जीवाणु से संक्रमित तो हो जाते हैं परंतु उन्हें यह रोग नहीं होता है और वे इसका संचरण अन्य व्यक्तियों तक नहीं कर सकते हैं।