22 मार्च: विश्व जल दिवस

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विश्व जल दिवस 22 मार्च को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है साथ ही यह जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करता है। वर्ष 2018 के लिए विश्व जल दिवस की थीम “नेचर फॉर वॉटर” है।

पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।

इतिहास:

‘विश्व जल दिवस’ मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को की थी। ‘विश्व जल दिवस’ की अंतरराष्ट्रीय पहल ब्राजील के शहर ‘रियो डि जेनेरियो’ में वर्ष 1992 में आयोजित ‘पर्यावरण तथा विकास के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (यूएनसीईडी) में की गई थी, जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में ‘जल दिवस’ के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।

कुछ प्रमुख जानकारी:

  • इजराइल ऐसा देश है जहां 25 सेमी. से भी कम वर्षा होती है किंतु वहां की कुशल जलप्रबंधन की तकनीक अधिक विकसित एवं क्रियान्वित है जिसके कारण जल का एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जाता है। प्रदूषित जल की वजह से प्रतिवर्ष 2.5 करोड़ से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है।
  • 15 करोड़ घरेलू महिलाएं 9 से 10 किलोमीटर तक जल प्रबंध के लिए यात्रा करती हैं जिनके श्रम का मूल्य 10 करोड़ रुपए से अधिक है।
  • धरती पर जितनी वर्षा प्रतिवर्ष होती है उससे 10 हजार से 12 हजार मिलियन हेक्टेयर मीटर पानी प्राप्त होता है और इस भूमंडल पर अभी 13 सौ मिलियन धन मीटर जल मौजूद है। बावजूद इसके पानी के लिए गर्मी के दिनों में मारा–मारी भी भयानक स्थिति निर्मित हो जाती है।
  • हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के कैपटाउन शहर में सूखे की खतरनाक स्थिति को देखते हुए ‘डे–जीरों नीति’ के तहत नलों से पानी आपूर्ति बंद कर दी गई है। सप्ताह में दो से अधिक बार नहाने में पाबंदी लगा दी गई है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए 25 लीटर पानी का प्रावधान बनाया जा रहा है।