14 नवंबर: विश्व मधुमेह दिवस

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प्रतिवर्ष 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मधुमेह के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है। इस दिवस का विषय है: महिलाओं और मधुमेह – एक स्वस्थ भविष्य के लिए हमारा अधिकार।

विश्व मधुमेह दिवस:

14 नवम्बर चाटर्रा बेन्टिंग का जन्म दिन है जिन्होंने कानाडा के टोरन्टो शहर में बेन्ट के साथ मिलकर सन 1921 में इन्सुलिन की खोज की थी। इतिहास की इस महान खोज को अक्षुण रखने के लिए इन्टरनेशनल डायबिटीज फेडेरेशन (आईडीएफ) द्वारा 14 नवम्बर को पिछले दो दशको से विश्व डायबिटीज दिवस 140 देशों में मनाया जाता है।हर साल मनाया जाता है। यह दिन डायबिटीज की खतरनाक दस्तक को लोगों को समझाती है। दिसंबर 2006 में मधुमेह को संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों में शामिल किया गया था। पहला विश्व मधुमेह दिवस वर्ष 1991 में मनाया गया था।

मधुमेह:

मधुमेह शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है। रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। धमनियों में बदलाव होते हैं। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह एक जानलेवा बीमारी है, और स्वास्थ्य संबंधी अन्य तमाम बीमारियों से जुड़ी हुई है।

भारतीय युवाओं में खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली मधुमेह की आशंका को बढ़ाती है। मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मधुमेह एशिया की बड़ी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरी है, एशियाई सबसे अधिक मात्रा में मधुमेह का शिकार हो रहे हैं।