10 दिसंबर: विश्व मानवाधिकार दिवस

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प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार दिवस पर मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा के लिये एक वर्षीय अभियान चलाया है जो आगामी मानवाधिकार दिवस की 70 वीं वर्षगांठ तक जारी रहेगा।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानव समाज पर ढाए गए अत्‍याचार और उसके बाद असमानता, हिंसा, भेदभाव को देखते हुए अधिकारों की जरूरत को समझकर संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल मानव अधिकार ड्राफ्ट किया, जो 10 दिसंबर को घोषित किया गया।

मानवाधिकार का ड्राफ्ट औपचारिक रूप से 4 दिसंबर 1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण अधिवेशन में लाया गया, जिसके तहत महासभा ने प्रस्ताव 423 (वी) को घोषित कर सभी देशों और संगठनों को अपने-अपने तरीके से मनाने के लिए कहा गया।

इस दिन मानव अधिकार के मुद्दों पर कई बड़ी राजनीतिक विमर्श, बैठक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। 10 दिसंबर को ही मानव अधिकार के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का पंचवर्षीय और नोबेल पुरस्कार दिया जाता है।

‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’:

भारत में भी 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून को लागू किया गया और 12 अक्टूबर 1993 को ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ का गठन हुआ। भारत में मानव अधिकार का मुख्य कार्यालय दिल्ली में है इसके अतिरिक्त हर प्रदेश व जिले में भी मानव अधिकार के कार्यालय स्थापित किए गए है। यह कार्यालय किसी सरकारी व गैर सरकारी अधिकारी के द्वारा किए गए ऐसे कार्यों की समीक्षा करता है जिसके खिलाफ सरकार कोई कदम ना उठा रही हो और वह मामला मानव अधिकार के हनन के दायरे में आता हो। 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,16,17,19,20,21,23,24,39,43,45 के तहत देश के अंदर मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है। संविधान किसी भी व्यक्ति के मानव अधिकारों का हनन होने पर सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक उपचार का अधिकार भी देता है।