01 दिसम्बर : विश्व एड्स दिवस

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विश्व एड्स दिवस पूरी दुनिया में हर साल 01 दिसम्बर को लोगों को एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम) के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। सर्वप्रथम वर्ष 1988 में विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया गया था। वर्ष 2018 में वर्ल्ड एड्स डे की थीम ‘अपनी स्थिति जानें’ है।

AIDS (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम) HIV (ह्यूमन इम्यूनो वायरस) की वजह से होता है, जो मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। इस रोग को पहली बार 1981 में मान्यता मिली। ये एड्स के नाम से पहली बार 27 जुलाई 1982 को जाना गया।

एचआईवी संक्रमण आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में प्रेषित हो जाता है यदि उन्होंने शारीरिक द्रव या रक्त श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से कभी सीधे संपर्क किया है। एड्स के बारे में समाज में कुछ मिथक फैल गये हैं। एड्स हाथ मिलाने, गले लगने, छींकने, अटूट त्वचा को छूने या एक ही शौचालय के उपयोग के माध्यम से कभी नहीं फैलता है।

एचआईवी / एड्स से संक्रमित व्यक्ति के निम्नलिखित संकेत और लक्षण है:

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • गले में खराश
  • रात के दौरान पसीना
  • बढ़ी हुई ग्रंथियाँ
  • वजन घटना
  • थकान
  • दुर्बलता
  • जोड़ो का दर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • लाल चकत्ते

विश्व एड्स दिवस का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह सेएड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना, और इस बीमारी से जिसकी मौत हो गई है उनका शोक मनना है। सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी, ग़ैर सरकारी संगठन और दुनिया भर में लोग अक्सर एड्स की रोकथाम और नियंत्रण पर शिक्षा के साथ, इस दिन का निरीक्षण करते हैं।

पृष्ठभूमि: 

विश्व एड्स दिवस की पहली बार कल्पना 1987 में अगस्त के महीने में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू.एच.ओ.(विश्व स्वास्थ्य संगठन) जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जॉननाथन मन्न (एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक) के साथ साझा किया, जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 में 01 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया। उनके द्वारा हर साल 1 दिसम्बर को सही रुप में विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया।