क़तर ने लिया ओपेक की सदस्यता छोड़ने का निर्णय

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क़तर ने हाल ही में ओपेक समूह की सदस्यता छोड़ने का लिया। क़तर का यह निर्णय जनवरी, 2019 से लागू हो जायेगा। क़तर ने अब प्राकृतिक गैस के उत्पादन पर बल देने का निर्णय लिया है। इस प्रकार क़तर ओपेक की सदस्यता छोड़ने वाला पहला देश बन जायेगा।

क़तर 1961 से ओपेक का सदस्य रहा है। खाड़ी राजनीती में उथल-पुथल के कारण क़तर ने यह लिया है। पिछले कुछ समय में क़तर को सऊदी अरब जैसे अन्य खाड़ी देशों के बहिष्कार का सामना करना पड़ा।

मुख्य बिंदु

क़तर विश्व का सबसे बड़ा तरल प्राकृतिक गैस का उत्पादक है, यह विश्व का 17वां सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है। क़तर के पास विश्व के कुल तेल भंडार का 2% हिस्सा है। क़तर ने अब प्राकृतिक गैस के उत्पादन पर फोकस करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में क़तर का प्राकृतिक गैस उत्पादन 77 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, क़तर ने इसे 110 मिलियन प्रतिवर्ष तक पहुँचाने की योजना बनायीं है।

ओपेक (OPEC)

ओपेक एक अंतरसरकारी संगठन है, इसमें 15 तेल निर्यातक देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 1960 में इराक के बगदाद में की गयी गयी थी। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में स्थित है। ओपेक का उद्देश्य पेट्रोलियम नीति पर सदस्य देशों के साथ समन्वय करना है तथा तेल बाज़ार की स्थिरता  तथा पेट्रोलियम की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

ओपेक देश विश्व के कुल 43% तेल का उत्पादन करते हैं, विश्व के तेल भंडार का 73% हिस्सा ओपेक देशों में स्थित है। ओपेक का दो तिहाई मध्य पूर्व के देशों द्वारा ही किया जाता है।

 

ओपेक के सदस्य

  • एशिया व मध्य पूर्व : ईरान, इराक, सौदरी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर
  • अफ्रीका : अल्जीरिया, अंगोला, लीबिया, नाइजीरिया, भूमध्य गिनी तथा गाबोन
  • दक्षिण अमेरिका : इक्वेडोर तथा वेनेज़ुएला