हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हिमांशु जोशी का निधन

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22 नवंबर 2018 को हिन्दी जगत के महान कवियों में से एक प्रसिद्ध कथाकार और पत्रकार हिमांशू जोशी का निधन हो गया है। हिमांशू जोशी का निधन 83 वर्ष की आयु में एक लंबी बीमारी के बाद हुआ। हिमांशु जोशी उत्तराखंड के रहने वाले थे।

हिमांशू जोशी का जन्म 04 मई 1935 खेतीखान के जोस्यूड़ा गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक खेतीखान से ही की। 

उन्होंने हिन्दी साहित्य में कई प्रसिद्ध रचनांए लिखी थीं। जोशी जी को हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू भाषा का भी ज्ञान था। उन्होंने कई रचनाएं की जिसमें अरण्य, महासागर, छाया मत छूना मन, कगार की आग, समय साक्षी है, तुम्हारे लिए, जैसे कई प्रसिद्ध उपन्यास अब तक प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा हिमांशू ने साहित्य की कई विधाओं में रचना की हैं उन्होंने कविता संग्रह, कहानी संग्रह, यात्रा वृत्तांत एवं वैचारिक संस्मरण भी प्रकाशित कर चुके हैं।

हिमांशू की कहानियों में- अंततः, मनुष्य चिन्ह, जलते हुए डैने, गंधर्व कथा, तपस्या, श्रेष्ठ प्रेम कहानियां, नंगे पांवों के निशान, एक बार फिर बर्फ गिरी तो, अग्नि संभव, नील नदी का वृक्ष, एक आंख कविता इत्यादि।

हिमांशू जोशी द्वारा लिखित कविताओं, कहानियों एवं उपन्यासों का कई क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है जिसमें तमिल, कोकंणी, कन्नड, मलयालम, बांग्ला, असमी, नेपाली, चीनी, बर्मी, जापानी, उडिया, मराठी, इत्यादि हैं।