हलीमा याकूब सिंगापुर की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं

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सिंगापुर संसद की पूर्व अध्यक्ष हलीमा याकूब 13 सितम्बर 2017 को देश की पहली महिला राष्ट्रपति बन गईं। निर्वाचन अधिकारी ने उनके अकेला योग्य उम्मीदवार होने की घोषणा की। इस के बाद बिना मतदान के ही हलीमा याकूब को देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुन लिया गया।

63 वर्षीय हलीमा याकूब को राष्ट्रपति पद हेतु होने वाले चुनाव का सामना इसलिए नहीं करना पड़ा क्योंकि प्रशासन ने इस पद पर खड़े होने के लिए उनके विरोधियों को अयोग्य घोषित कर दिया।
सिंगापुर में इस बार राष्ट्रपति का पद अल्पसंख्यक मुस्लिम मलय समुदाय के उम्मीदवार हेतु आरक्षित था। सिंगापुर संसद की अध्यक्ष के तौर पर अपने अनुभव के कारण हलीमा याकूब को राष्ट्रपति पद के नामांकन के नियमों के तहत योग्य उम्मीदवार घोषित किया गया। ऐसा पहली बार किया गया कि खास जातीय समूह मलय समुदाय के लिए राष्ट्रपति पद आरक्षित कर दिया गया।

राष्ट्रपति चुने जाने के बाद हलीमा याकूब ने देश की जनता को संबोधित किया। हलीमा याकूब के अनुसार यह एक आरक्षित चुनाव था लेकिन मैं आरक्षित राष्ट्रपति नहीं हूं, मैं सिंगापुर की जनता की राष्ट्रपति हूं।
राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले हलीमा याकूब सत्तारूढ़ ऐक्शन पार्टी से पिछले दो दशक से संसद सदस्या थी। हलीमा याकूब से पूर्व देश के आखिरी मलय राष्ट्रपति युसूफ ईशाक थे।
पूर्व राष्ट्रपति युसूफ ईशाक की तस्वीर सिंगापुर में देश के नोटों पर छपी है। वह वर्ष 1965 से 1970 के दौरान सिंगापुर के राष्ट्रपति रहे। निर्वाचन विभाग ने बताया कि राष्ट्रपति पद के लिए जिन अन्य 4 लोगों ने आवेदन किया, उनमें से दो मलय नहीं थे और दो ने योग्यता प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया।
सिंगापुर में दशकों से एक ही पार्टी सत्ता में है। देश में पहले से ही चुनाव की प्रक्रिया को लेकर अशांति का माहौल है। बिना वोट के ही हलीमा के हाथ में सत्ता सौंपने के फैसले ने लोगों को गुस्सा और बढ़ा दिया।