सितम्बर को देश भर में राष्ट्रीय पोषण मास के रूप मनाया जायेगा

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की है कि सितम्बर 2019 को राष्ट्रीय पोषण मास के रूप में मनाया जायेगा, इसका उद्देश्य देश में कुपोषण की समस्या को समाप्त करना है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम के दौरान की।

इसका उद्देश्य प्रसवपूर्व देखभाल, स्तनपान तथा एनीमिया, तथा बालिकाओं के लिए पोषण का महत्व, स्वच्छता तथा विवाह की सही उम्र के बारे में जागरूकता फैलाना है। अभियान का उद्देश्य ‘हर घर पोषण त्यौहार’ का सन्देश पहुँचाना है।

इसका आयोजन संयुक्त रूप से नीति आयोग, महिला व बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पेयजल व स्वच्छता मंत्रलाय, आवास व शहरी मामले मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, जनजातीय मामले मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय द्वारा द्वारा किया जायेगा। 

पृष्ठभूमि:

भारत में कुपोषण की समस्या काफी गंभीर है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार भारत के 38% बच्चों की ऊंचाई कम है, 21% बच्चों का भार उनकी ऊंचाई के मुकाबले बहुत कम है जबकि 35.7% बच्चों का वज़न आवश्यकता से कम है।

2005-06 के मुकाबले 2015-16 में बच्चों के शारीरिक विकास में कमी आई है, 2005-06 में 19.8% बच्चों का भार उनकी ऊंचाई के अनुरूप कम था, जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा बढ़ कर 21% हो गया।

भारत में औसतन 5 बच्चों में से एक बच्चा वेस्टेड (ऊंचाई के अनुरूप वज़न कम होना) है।

सरकार ने पोषण अभियान के लिए 9000 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की है, यह मार्च, 2018 में लांच किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों, महिलाओं व किशोरियों  के शारीरिक विकास के मार्ग में बाधाओं को दूर करना है। इस अभियान का उद्देश 2022 तक बच्चों में स्टंटिंग (कुपोषण के कारण ऊंचाई कम होना) की दर को 38.4% से कम करके 25% तक लाना है।