सर्वोच्च न्यायालय के सभी मंज़ूर पदों पर नियुक्ति

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हाल ही में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चार न्यायाधीशों के नाम को मंज़ूरी देते हुए न्यायालय में न्यायाधीशों की रिक्तियों (30+1) को पूर्ण करने के आदेश दिये हैं। सरकार द्वारा न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, ए. एस. बोपन्ना, बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नामों को मंज़ूरी दी गई है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 (Article 124) भारत के राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति प्रदान करता है। सर्वोच्च न्यायालय के कोलेज़ियम द्वारा सरकार के पास वरिष्ठ न्यायाधीशों के नाम भेजे जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में परिवर्तन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया जाता है। अंतिम बार वर्ष 2009 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या को 25 से बढ़ाकर 31 किया गया था।

भारतीय संविधान में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना से सम्बंधित प्रावधान:

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति अन्य न्यायाधीशों एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सलाह के बाद करता है। इसी तरह अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति भी होती है। मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश का परामर्श आवश्यक है।

राष्ट्रपति के आदेश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद से हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति ऐसा तभी कर सकता है, जब इस प्रकार हटाए जाने हेतु संसद द्वारा उसी सत्र में ऐसा संबोधन किया गया हो। इस आदेश को संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत (यानी सदन की कुल सदस्यता का बहुमत तथा सदन में उपस्थित एवं मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) का समर्थन प्राप्त होना चाहिये। उसे हटाने का आधार उसका दुर्व्यवहार या सिद्ध कदाचार होना चाहिये।

भारत में कोलेजियम प्रणाली:

कोलेजियम में सदस्यों की संख्या 5 होती है। पाँच सदस्यों में से एक भारत के मुख्य-न्यायाधीश और चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश होते हैं।

न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में इस मंडल की आम सहमति होनी चाहिये। यदि कोलेजियम के के दो न्यायाधीश किसी न्यायाधीश के निर्णय के विरुद्ध हैं, तो राष्ट्रपति के समक्ष नियुक्ति की सलाह नहीं दी जाएगी। कोलेजियम के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का निर्णय सदैव शामिल होना चाहिये।