समावेशी विकास सूचकांक में भारत 62वें स्थान पर

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विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए जारी समावेशी विकास सूचकांक की रैंकिंग में भारत दो पायदान फिसलकर 62वें स्थान पर रहा. इस मामले में भारत चीन और पाकिस्तान से भी पीछे है। नॉर्वे दुनिया की सबसे समावेशी आधुनिक विकसित अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वहीं लिथुआनिया उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है। इस सूचकांक में रहन-सहन का स्तर, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊपन और भविष्य की पीढ़ियों को और क़र्ज़ के बोझ से संरक्षण आदि पहलुओं को शामिल किया जाता है।

मुख्य तथ्य:

  • पाकिस्तान पांच पायदान चढ़कर 47वें स्थान पर रहा। इस सूची में चीन 26वें स्थान पर है।
  • श्रीलंका 40वे स्थान पर, बांग्लादेश 34वे स्थान पर और नेपाल 22वे स्थान पर शामिल हैं।
  • भारत से कहीं छोटे देश माली, युगांडा, रवांडा, बुरुंडी, घाना, यूक्रेन, सर्बिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया, ईरान, मैसेडोनिया, मैक्सिको, थाईलैंड और मलेशिया भी अर्थव्यवस्था के नाम पर भारत से अमीर है।
  • विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नॉर्वे के बाद आयरलैंड, लग्जमबर्ग, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क शीर्ष पांच में शामिल हैं।
  • इस सूचकांक में जर्मनी 12वें, कनाडा 17 वें, फ्रांस 18वें, रूस 19वें, ब्रिटेन 21वें, अमेरिका 23वें, जापान 24वें, इटली 27वें, ब्राजील 37वें, और दक्षिण अफ्रीका 69वें स्थान पर है।

पृष्ठभूमि:

समावेशी विकास सूचकांक के लिए 103 देशों की अर्थव्यवस्था को तीन पैमानों पर मापा गया था। वृद्धि और विकास, समावेश और इंटर जेनरेशनल इक्विटी। सूचकांक को दो हिस्सों में बांटा गया था। पहले हिस्से में 29 प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाओं को रखा गया था, जबकि दूसरे हिस्से में 74 उभरती अर्थव्यवस्थाओं को जगह दी गई थी। पिछले साल 79 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भारत 60 वां स्थान पर रहा था, जबकि चीन 15 वें और पाकिस्तान 52 वें स्थान पर था। उभरती अर्थव्यवस्था के नाम पर बेहद कम स्कोर होने के बावजूद तेजी से विकास करने वाले दस देशों में भारत ने अपनी जगह बनाई है।