समग्र जल प्रबंधन सूचकांक पर रिपोर्ट जारी

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नीति आयोग ने जीवन में जल के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (सीडब्ल्यूएमआई) पर एक रिपोर्ट तैयार की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और पोतवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने इस रिपोर्ट को जारी किया।

  • रिपोर्ट के अनुसार देश की सबसे बड़ी समस्या जल प्रबंधन की है। इस रिपोर्ट ने प्रतिबिंबित किया है कि जिन राज्यों ने पानी को सही तरीके से प्रबंधित किया है, उन्होंने उच्च कृषि वृद्धि दर प्रदर्शित की है।
  • मध्य प्रदेश में 22-23 फीसदी की वृद्धि दर है, जबकि गुजरात में 18 फीसदी की वृद्धि दर है। 
  • जल प्रबंधन के मानकों पर राज्यवार प्रदर्शन रिपोर्ट, 2016-2017 के संदर्भ में गुजरात पहले स्थान पर है, इसके बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र हैं।
  • सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और झारखंड हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार ऐसे राज्य हैं जहाँ दूषित पानी के शोधन की क्षमता विकसित ही नहीं की गई है। भू-जल के इस्तेमाल का नियमन भी इन राज्यों में नहीं है। वहीं, ग्रामीण बसावट में साफ पेयजल की आपूर्ति लगभग नगण्य है।  
  • जल संसाधन मंत्रालय के एकीकृत जल संसाधन विकास के लिये राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च उपयोग परिदृश्य में 2050 तक पानी की आवश्यकता 1,180 BCM होने की संभावना है, जबकि वर्तमान में उपलब्धता मात्र 695 BCM है।
  • देश में प्रस्तावित जल की मांग 1137 BCM की तुलना में अभी भी काफी कम है|
  • सूचकांक में 28 विभिन्न संकेतकों के साथ नौ व्यापक क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें भू-जल के विभिन्न पहलुओं, जल निकायों की बहाली, सिंचाई, कृषि प्रथाओं, पेयजल, नीति और शासन शामिल हैं।
  • विश्लेषण के प्रयोजन के लिये विभिन्न जलविद्युत स्थितियों के कारण राज्यों को दो विशेष समूहों – ‘उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों’ तथा ‘अन्य राज्यों’ में बाँटा गया था।