श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा की गई

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05 मार्च 2018 को श्रीलंका ने कैंडी जिले में में 10 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा की गई है। कैंडी जिले में बौद्ध एवं मुस्लिम समुदाय के बीच हिंसक झड़पों के बाद श्रीलंका सरकार ने यह कदम उठाया है।

बौद्ध एवं मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच पिछले एक साल से ज्यादा समय से तनाव चल रहा है। देश के कुछ बौद्ध समूहों का आरोप है कि मुस्लिम लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए बाध्य कर रहे हैं और बौद्ध धर्म से जुड़ीं पुरातत्विक महत्व के स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा कुछ राष्ट्रवादी सोच रखने वाले बौद्ध समुदाय के लोगों ने श्रीलंका में शरण देने की मांग करने वाले म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया है। 

पिछले कुछ दिनों से श्रीलंका में दो समुदायों मध्य खूनी झड़प एवं हिंसा जारी है। पूरे देश का माहौल तनाव पूर्ण है। श्रींलका के कैंडी शहर में बौद्ध समुदाय का व्यक्ति मारा गया एवं मुस्लिम व्यापारियों की दुकानों में आग लगादी गयी। इस घटना ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी है जिसके चलते श्रीलंका की सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है। श्रीलंका के कुछ संगठनों में इस हिंसा के पीछे एवं हिंसा का जिम्मेदार राष्ट्रवादी बौद्ध संगठन बोडू बाला सेना (बीबीएससमूह को ठहराया है। संगठनों ने दावा किया है कि बीबीएस से जुड़े लोग मुस्लमानों के स्वामित्व वाले दुकानों और मस्जिदों पर हमले कर रहे हैं।

पृष्‍ठभूमि:

श्रीलंका की आबादी लगभग 2 करोड़ 12 लाख हैं जिनमें 75 प्रतिशत बौद्ध हैं और 10 प्रतिशत मुसलमान हैं। श्रीलंका में जून  2014 में भी मुस्लिम विरोधी प्रदर्शन हुए थे जो बाद में हिंसात्मक हो गये और अलुथगमा हिंसा में काफी लोग मारे गए। राष्ट्रपति एम सिरीसेना ने 2015 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिम विरोध अपराध को लेकर जांच शुरू करवाई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई खास प्रगति नहीं देखने को मिली।