श्रवणबेलगोला : 88वें महामस्तकाभिषेक का आयोजन

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17-25 फरवरी, 2018 को कर्नाटक के हासन ज़िले में स्थित श्रवणबेलगोला 88वें महामस्तकाभिषेक समारोह का आयोजन किया जाएगा। श्रवणबेलगोला जैन समुदाय का पवित्र तीर्थ स्थल है। प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित किये जाने वाले इस समारोह का पिछली बार 2006 में आयोजन किया गया था।

कार्यक्रम के मुख्‍य बिदु:

  • महामस्तकाभिषेक के लिए 30 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। ठहरने के लिए 11 नगर बसाए गए हैं। इस पर 175 करोड़ रु. खर्च आया है। इसके अलावा पास के सारे होटल बुक हैं। 
  • संतों के लिए त्यागी नगर बनाया गया है। महोत्सव को भव्य बनाने के लिए देशभर में 40 कमेटियां बनाई गई हैं। उपचार के लिए एक सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल खोला गया है। 
  • महोत्सव के पहले दिन 108 कलश से अभिषेक होगा। अगले दिन 1008 कलश से अभिषेक होगा। 
  • हजारों लीटर दूध, दही, केसर व अन्य सामग्री से भगवान का अभिषेक होता है। इससे प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान न हो इसलिए पुरातत्व विभाग ने विशेष रसायन की परत चढ़ाई है। 
  • मंदिर जाने के लिए 618 सीढ़ियों की चढ़ाई है। जो नहीं चढ़ सकते उनके लिए पालकियां होंगी।
  • महोत्सव में 17 तरह की भोजनशाला भी बनाई जा रही है। इसमें हर राज्य का भोजन मिलेगा। रोज करीब एक लाख लोगों का भोजन बनेगा। 
  • 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के हजारों वॉलंटियर भी हिस्सा लेंगे। 
  • आयोजन पर 585 करोड़ रु. खर्च का अनुमान है। पिछले बार 116 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। 

ऐतिहासिक तथ्य:

  • श्रवणबेलगोला शहर के पास चंद्रगिरि पहाड़ी की चोटी पर जैन संत बाहुबली की 57 फीट की प्रतिमा स्थापित है। इन्हें गोमतेश्वर भी कहा जाता है। 
  • 983 AD में गंग शासक रचमल्ल के एक मंत्री चामुण्डाराय द्वारा इस विशालकाय प्रतिमा का निर्माण करवाया गया था। AD 981 में यहाँ महामस्तकाभिषेक की परंपरा शुरू हुई थी।
  • ऐसा माना जाता है कि इस प्रतिमा को एक ही सफ़ेद ग्रेनाइट पत्थर को काटकर निर्मित किया गया है। जैन धर्म की परम्परानुसार संत बाहुबली की यह प्रतिमा वस्त्रहीन है।
  • जैन अनुश्रुति के अनुसार, मौर्य वंश के संस्थापक सम्राट चन्द्रगुप्त ने राजपाट त्यागकर जैन धर्मं में दीक्षा लेने के बाद अपना शेष जीवन तपस्या करते हुए श्रवणबेलगोला में ही बिताया था।

जैन संत बाहुबली (गोमतेश्वर):

  • संत बाहुबलि को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का पुत्र माना जाता है। 
  • बाहुबलि ने अपने बड़े भाई भरत को पराजित कर विजित राज्य उसी को लौटा दिया था और स्वयं राजपाट त्यागकर तपस्या करने लगे।
  • जैन मान्यताओं के अनुसार, जैन धर्म में सबसे पहले मोक्ष संत बाहुबली को ही प्राप्त हुआ था। संत बाहुबलि को आज भी जैन धर्म में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।
  • मनुष्य की मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान के लिये संत बाहुबली ने चार बातें बताई थीं- 
  1. अहिंसा से सुख।
  2. त्याग से शांति।
  3. बंधुत्व से प्रगति। 
  4. ध्यान से सिद्धि की प्राप्ति।