वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2018

0
580

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी तथा मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2018 जारी किया गया। इसके अनुसार 2005-06 के बाद से भारत में 270 मिलियन से ज़्यादा लोग गरीबी से मुक्त हुए हैं और देश में गरीबी दर 10 साल की अवधि में लगभग आधी हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में दिल्ली, केरल और गोवा में गरीबों की संख्या सबसे कम है।

वैश्विक दृष्टिकोण:

  • विश्व के कुल बहुपक्षीय गरीबों में 83 प्रतिशत (1.1 अरब से अधिक) उप-सहारा अफ्रीका एवं दक्षिण एशिया में हैं।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच भारत में 271 मिलियन (27.1 करोड़) लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया, इसके बावजूद अभी भी विश्व के सर्वाधिक 364 मिलियन (36.4 करोड़) भारतीय मल्टी डायमेंशनल गरीबी में जीवन जी रहे हैं।
  • भारत के पश्चात नाइजीरिया (97 मिलियन), इथियोपिया (86 मिलियन) और बांग्लादेश (67 मिलियन) में सर्वाधिक लोग मल्टीडायमेंशनल गरीबी में जीवन जी रहे हैं।
  • इस सूचकांक के अनुसार सभी गरीब लोगों में 46 प्रतिशत (61-2 करोड़) कम से कम छह संकेतकों में अपवंचित हैं।
  • सूचकांक के मुताबिक मल्टीडायमेंशनल गरीब लोगों में 49.9 प्रतिशत या 666 मिलियन 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं।

भारतीय परिदृश्य:

  • रिपोर्ट में कहा गया, भारत में सबसे ज्यादा गरीबी चार राज्यों में है। हालांकि भारत भर में छिटपुट रूप से गरीबी मौजूद है, लेकिन बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गरीबों की संख्या सर्वाधिक है। 
  • इन चारों राज्यों में पूरे भारत के आधे से ज्यादा गरीब रहते हैं, जोकि करीब 19.6 करोड़ की आबादी है। रिपोर्ट के अनुसार गरीबी के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी कारन खराब पोषण रहा।
  • मध्य प्रदेश का अलीराजपुर जिला देश का सर्वाधिक गरीब जिला है जहां की 76.5 प्रतिशत आबादी गरीब है।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI):

MPI को ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (OPHI) तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा 2010 में विकसित किया गया था। मुख्यतः 10 संकेतकों पर MPI का आकलन किया जाता हैं। इनमें पोषण, स्वच्छता, आवास एवं स्कूल में व्यतीत किए गए वर्ष शामिल हैं। ये 10 संकेतक तीन श्रेणियों में विभाजित हैं:

  1. स्वास्थ्यः पोषण व शिशु मृत्यु दर
  2. शिक्षाः स्कूलिंग वर्ष व स्कूल में उपस्थिति
  3. रहन-सहनः खाना पकाने का ईंधन, शौचालय, पेयजल, बिजली, आवास व संपत्ति।