विश्व रक्तदान दिवस: 14 जून

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विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है। विश्व रक्तदान दिवस 2018 की थीम है- Be there for someone else. Give blood. Share life..

भारत में रक्तदान:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है। लेकिन 75 लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाता है। यानी क़रीब 25 लाख यूनिट ख़ून के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं। भारत की आबादी सवा अरब है, जबकि रक्तदाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं है। भारत में कुल रक्तदान का केवल 49 फीसदी रक्तदान स्वेच्छिक होता है। राजधानी दिल्ली में तो स्वैच्छिक रक्तदान केवल 32 फीसदी है। दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं पर फिर भी एक लाख यूनिट ख़ून की कमी है।

रक्तदान को लेकर भ्रांतियाँ:

बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है,और उस रक्त की भरपाई होने में महीनों लग जाते हैं। इतना ही नहीं लोगों में यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित ख़ून देने से लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और व्यक्ति को बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं। 

रक्तदान की प्रमुख बाते:

  • मनुष्य के शरीर में रक्त बनने की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है, और रक्तदान से कोई भी नुकसान नहीं होता है।
  • कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच हो, और 45 किलोग्राम से अधिक वजन का हो, रक्‍तदान कर सकता।
  • जिसे एचआईवी,हेपाटिटिस बी या सी जैसी बीमारी न हो,वह रक्तदान कर सकता है। 
  • एक बार में 350 मिलीग्राम रक्त दिया जाता है, उसकी पूर्ति शरीर में चौबीस घण्टे के अन्दर हो जाती है, और गुणवत्ता की पूर्ति 21 दिनों के भीतर हो जाती है। 
  • जो व्यक्ति नियमित रक्तदान करते हैं, उन्हें हृदय सम्बन्धी बीमारियां होने का खतरा कम रहता हैं। 
  • हमारे रक्त की संरचना ऐसी है कि उसमें समाहित रेड ब्लड सेल तीन माह में स्वयं ही मर जाते हैं,लिहाज़ा प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। 
  • डाक्टरों के मुताबिक रक्त का लम्बे समय तक भण्डारण नहीं किया जा सकता है।

पृष्‍ठभूमि:

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1997 से प्रत्येक वर्ष 14 जून को ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी। इसके अंतर्गत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़े। अबतक विश्व के लगभग 49 देशों ने ही इस पर अमल किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्ल लेण्डस्टाइनर नामक विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद की याद में उनके जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के तौर पर मनाता है। उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया। इस वर्गीकरण ने चिकित्‍सा विज्ञान में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। इस महत्‍वपूर्ण खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्‍टाईन को वर्ष 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था।