वित्त मंत्रालय ‘प्रोजेक्ट इनसाइट’ शुरू करेगा

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वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला आयकर विभाग अक्टूबर 2017 से ‘प्रोजेक्ट इनसाइट’ शुरू करने जा रहा है। इसके तहत विभाग बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण और सोशल साइटों पर मौजूद सूचनाओं को मिलाएगा, जिससे किसी व्यक्ति के खर्च के तरीके और घोषित आमदनी के बीच अंतर का पता लगाया जा सके।

कर विभाग कर चोरी और काले धन को पकड़ने के लिए आय घोषणा तथा खर्च के तरीके में अंतर का विश्लेषण करेगा। किसी व्यक्ति की आय और संपत्ति का पता लगाने के लिए आयकर विभाग ने पैन को आधार से जोड़ना भी अनिवार्य कर दिया है। कर विभाग ने पिछले साल प्रोजेक्ट इनसाइट के क्रियान्वयन के लिए एलएंडटी इन्फोटेक के साथ करार किया था। इसका मकसद कर अनुपालन में सुधार के लिए सूचनाओं को जुटाना है। प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसा वर्चुअल हाउस बनाने की तैयारी हो रही है, जिसके जरिए लोगों की खर्च करने की सीमा को बैंक अकाउंट के साथ-साथ सोशल मीडिया जैसे कि फेसबुक, इंस्टाग्राम से मैच किया जाएगा।

ये प्रोजेक्ट पिछले सात सालों से तैयार हो रहा था। केंद्र सरकार ने इस पर 10 बिलियन (1000 करोड़) रुपये खर्च किए हैं। सरकार का मकसद इस प्रोजेक्ट के जरिए विश्व का सबसे बड़ा बॉयोमेट्रिक डाटाबेस तैयार कर रही है।

इस डाटाबेस से इनकम टैक्स, ईडी, बैंक, एनआईए को भी टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि काफी लोग अभी भी अपनी कमाई की सही तरह से जानकारी नहीं दे रहे हैं। वहीं लोग अपने घूमने-फिरने, घर-बाइक, कार खरीदने पर सबसे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, जिससे अन्य लोगों को पता चल सके। अब सरकार के इस कदम से लोगों को काफी सावधानी बरतनी पड़ेगी।

प्रोजेक्ट इनसाइट से लाभ:

सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रोजेक्ट इनसाइट परियोजना से सूचना आधारित रुख को मजबूत करने में मदद मिलेगी और कर अनुपालन में सुधार होगा। ऊंची कीमत वाले खर्चों, लेनदेन का पता लगाने और कालेधन के प्रवाह पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

इस नए तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल विदेशी खाता कर अनुपालन कानून (फाटका) और सामान्य रिपोर्टिंग मानक (सीआरएस) के लिए भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट इनसाइट के तहत एक नया अनुपालन प्रबंधन केंद्रीयकृत प्रसंस्करण केंद्र (CMCPC) स्थापित किया जाएगा।