लोकसभा ने दिवालिया संहिता संशोधन विधेयक 2017 पारित किया

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लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) में संशोधन विधेयक 2017 पारित कर दिया गया, ताकि इस विधेयक की कमियों को दूर किया जा सके और जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाले बकाएदार खुद की परिसंपत्तियों की बोली नहीं लगा सकें। आईबीसी का क्रियान्वयन कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

मुख्‍य बिंदु:

  • विधेयक में कॉरपोरेट गारंटरों के लिए नियमों को नरम बनाए जाने का प्रस्ताव है।
  • विधेयक में अध्यादेश के कुछ प्रावधानों को पूर्वप्रभावी बनाया गया है। उदाहरण के लिए, इसमें प्रस्ताव रखा गया है कि ऋणदाताओं की समिति उस स्थिति में नए आवेदन आमंत्रित करेगी जब दिवालिया कंपनियों के लिए आवेदन करने वाले प्रवर्तकों को अध्यादेश द्वारा अयोग्य माना गया हो।
  • विधेयक में दिवालिया कंपनियों के प्रवर्तकों को बकाया चुका कर अपने ऋणों को स्टैंडर्ड परिसंपत्तियां बनाने के लिए 30 दिन का समय देने का प्रस्ताव है। वहीं दूसरी तरफ प्रवर्तक को अयोग्य घोषित करने के लिए मानकों को सख्त बनाए जाने की भी संभावना पर जोर दिया गया है।
  • यदि 30 दिन की अवधि पर सख्ती से अमल नहीं किया जाता है तो एक साल से अधिक की एनपीए से जुड़े किसी भी प्रवर्तक को आवेदन से अयोग्य माना जाएगा।
  • मूल कानून में वर्ष की गणना परिसंपत्तियों को एनपीए घोषित किए जाने से आवेदन के आमंत्रण तक की अवधि को ध्यान में रखकर की गई है। विधेयक में इसकी गणना दिवालियापन के आवेदन को नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकार किए जाने तक की अवधि को ध्यान में रखकर किए जाने पर जोर दिया गया है।
  • विधेयक में कहा गया है कि ऋणदाताओं की समिति द्वारा प्रवर्तक को अपनी एनपीए को स्टैंडर्ड परिसंपत्तियों के तौर पर घोषित करने के लिए बकाया भुगतान के लिए 30 दिन तक का समय दिया जाएगा।