राष्ट्रीय बालिका दिवस : 24 जनवरी

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भारत में प्रत्येक वर्ष महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा 24 जनवरी को एक विशिष्ट विषय के साथ राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2019 के लिए इस दिवस की थीम “उज्ज्वल कल के लिए लड़कियों का सशक्तिकरण” है। इस वर्ष कार्यक्रम में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना की वर्षगांठ भी मनाई जाएगी। इस अवसर पर “बीबीबीपी के तहत नवाचार” पर एक पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा।

बालिका दिवस का उद्देश्य:

  • समाज में बालिका शिशु के लिये नये मौके देता है और लोगों की चेतना को बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय कार्य के रुप में इसे मनाया जाता है।
  • भारतीय समाज के बालिका शिशुओं के द्वारा सामना किये जा रहे है असमानता को हटाना।
  • ये सुनिश्चित किया जाये कि भारतीय समाज में हर बालिका शिशु को उचित सम्मान और महत्व दिया जा रहा है।
  • ये सुनिश्चित किया जाये कि देश में हर बालिका शिशु को उसके सभी मानव अधिकार मिलेंगे।
  • गिरते हुए बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) के बारे में जागरूकता पैदा करना और बालिका के आसपास सार्थक वातावरण बनाना। 
  • बालिका शिशु के महत्व और भूमिका के बारे में जागरुकता बढ़ाने के द्वारा बालिका शिशु की ओर दंपत्ति को शुरुआत करनी चाहिये।
  • उनके स्वास्थ्य, सम्मान, शिक्षा, पोषण आदि से जुड़े मुद्दों के बारे में चर्चा करना।
  • भारत में लोगों के बीच लिंग समानता को प्रचारित करना।

ध्यान देने योग्य है कि हमारे देश में, महिला साक्षरता दर अभी भी 53.87% है और युवा लड़कियों का एक-तिहाई कुपोषित हैं। स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुँच और समाज में लैंगिक असमानता के कारण विभिन्न दूसरी बीमारियों और रक्त की कमी से प्रजननीय उम्र समूह की महिलाएँ पीड़ित हैं। विभिन्न प्रकार की योजनाओं के द्वारा बालिका शिशु की स्थिति को सुधारने के लिये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बहुत सारे कदम उठाये गये हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने “धनलक्षमी” नाम से एक योजना की शुरुआत की है जिसके तहत बालिका शिशु के परिवार को नकद हस्तांतरण के द्वारा मूलभूत जरुरतों जैसे असंक्रमीकरण, जन्म पंजीकरण, स्कूल में नामांकन और कक्षा 8 तक के रखरखाव को पूरा किया जाता है। शिक्षा का अधिकार कानून ने बालिका शिशु के लिये मुफ्त और जरुरी शिक्षा उपलब्ध कराया गया है।बालिकाओं को जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिये बहुत अच्छे से कानून सहित घरेलु हिंसा की धारा 2009, बाल-विवाह रोकथाम एक्ट 2009, दहेज रेकथाम एक्ट 2006 आदि से अवगत होना चाहिये।