राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान

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हाल ही में, 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस के मौके पर राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान शुरू किया गया। राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। यह कार्यक्रम मानव संसाधन और विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और पेयजल तथा स्वच्छता मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस के इस चरण में 32 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य है।

मुख्‍य बिंदु:

  • राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस एक दिन का कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता तक पहुँच , पोषण संबंधी स्थिति एवं बच्चों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिये बच्चों को परजीवी आंत्र कृमि संक्रमण से मुक्त करने के लिये दवा उपलब्ध कराना है।
  • इस कार्यक्रम में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के मंच के माध्यम से 1-19 वर्ष की आयु समूह के स्कूल और आंगनवाड़ी से जुड़े सभी बच्चों को शामिल किया जाता है।
  • बच्चों को कृमि मुक्त करने के लिये एलबेंडाजोल नामक टैबलेट दी जाती है।
  • यह कार्यक्रम हर वर्ष 10 फरवरी और 10 अगस्त को आयोजित किया जाता है। अगर कोई भी बच्चा किसी वजह से, खासतौर से गैरहाजिर होने या बीमार होने से राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस में नहीं शामिल हो पाया तो उसे 15 फरवरी को दवा दी जाती है।
  • राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस सभी स्वास्थ्य कर्मियों, राज्य सरकारों और दूसरे हितधारकों को मिट्टी-संचारित कृमि संक्रमण के खात्मे के लिये प्रयास करने हेतु प्रेरित करता है।
  • राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस जैसे कार्यक्रमों के कारण न केवल स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आ रही है बल्कि उनके संपूर्ण विकास में भी मदद मिल रही है। 
  • कृमि निवारण के साथ-साथ बच्चों में साफ-सफाई के अभ्यास पर विशेष जोर दिया गया है ताकि उन्हें  कृमि समस्या का सामना न करना पड़े। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इस दिशा में खुले में शौच से मुक्ति के लिये विशेष उपायों पर जोर दे रहा है ताकि इस तरह के वातावरण का निर्माण हो सके जिससे किसी भी समुदाय को ऐसी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

पृष्ठभूमि:

2015 में राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस की शुरुआत की गई थी, जिसे 11 राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के ज़रिये 1 से लेकर 19 वर्ष की उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर क्रियान्वित किया गया। उसके बाद से पूरे देश में इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। पिछले वर्ष फरवरी 2017 के चक्र में 25.6 करोड़ बच्चों और अगस्त 2017 वाले चक्र में 22.8 करोड़ बच्चों तक पहुँचने का सफल प्रयास किया गया और उन्हें राष्ट्रीय कृमि निवारक दिवस पर कृमि निवारक उपचार मुहैया कराया गया।

जिन राज्यों में STH संक्रमण 20% प्रतिशत से अधिक है वहाँ कृमि मुक्ति के द्विवार्षिक चरण की सिफ़ारिश की जाती है तथा अन्य राज्यों में वार्षिक चरण आयोजित किया जाता है।