राजकोट अल्फ्रेड हाई स्कूल में महात्मा गांधी संग्रहालय का उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 सितम्बर को गुजरात के राजकोट में महात्मा गांधी संग्रहालय का उद्घाटन किया। यह संग्रहालय राजकोट में अल्फ्रेड हाई स्कूल में बनाया गया है। गांधी जी ने 7 साल तक यहाँ पढ़ाई की थी।

आज़ादी के बाद अल्फ्रेड हाई स्कूल का नाम बदल कर मोहन दास गांधी विद्यालय कर दिया था। यह गुजराती माध्यम का स्कूल है। वर्ष 2017 में इस स्कूल को बंद कर संग्रहालय में तब्दील करने के प्रस्ताव को गुजरात सरकार ने मंज़ूर किया था।

महात्मा गांधी 1887 में 18 साल की उम्र में इस स्कूल से पास हुए थे। यहाँ गांधी जी जीवन के अलग-अलग पड़ाव को अलग-अलग हिस्सों में दर्शाया गया है। संग्राहलय में गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका दौरे से जुड़े रोचक किस्सों को डिजिटलीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पीटरमारिट्जबर्ग में ट्रेन से जबरन उतारने के दर्दनाक हादसे को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया है।

महात्मा गांधी:

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को भारत के गुजरात राज्य के पोरबंदर क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता श्री करमचंद गांधी पोरबंदर के ‘दीवान’ थे और माता पुतलीबाई एक धार्मिक महिला थी। गांधीजी के जीवन में उनकी माता का बहुत अधिक प्रभाव रहा। उनका विवाह 13 वर्ष की उम्र में ही हो गया था और उस समय कस्तूरबा 14 वर्ष की थी। नवंबर, सन 1887 में उन्होंने अपनी मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और जनवरी, सन 1888 में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया था और यहाँ से डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे लंदन गये और वहाँ से बेरिस्टर बनकर लौटे।

उन्हें कई आन्दोलन किये जिनमे: चंपारन और खेड़ा सत्याग्रह(1918), खिलाफत आंदोलन (1919), असहयोग आंदोलन (1920), अवज्ञा आंदोलन / नमक सत्याग्रह आंदोलन / दांडी यात्रा (1930), भारत छोड़ो आंदोलन (1942) आदि प्रमुख थे।

गांधी जी ने अपना जीवन सत्य, या सच्चाई की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने करने के लिए अपनी स्वयं की गल्तियों और खुद पर प्रयोग करते हुए सीखने की कोशिश की। उन्होंने अपनी आत्मकथा को ‘सत्य के प्रयोग’ का नाम दिया।

गाँधी जी द्वारा मौलिक रूप से लिखित पुस्तकें चार हैं- हिंद स्वराज, दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास, सत्य के प्रयोग (आत्मकथा), तथा गीता पदार्थ कोश सहित संपूर्ण गीता की टीका। गाँधी जी आमतौर पर गुजराती में लिखते थे, परन्तु अपनी किताबों का हिन्दी और अंग्रेजी में भी अनुवाद करते या करवाते थे।