रमन मैगसेसे पुरस्कार, 2018

0
63

हाल ही में नोबेल पुरस्कार का एशियाई संस्करण कहलाने वाला रमन मैग्सेसे पुरस्कार 2018 के लिये दो भारतीय समाजसेवियों भरत वाटवानी और सोनम वांगचुक को को चुना गया है। ये इस साल इस अवार्ड को जीतने वाले 6 लोगों में से हैं।

भरत वाटवानी एक मनोवैज्ञानिक है, उन्होंने ‘श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन’ की स्थापना की थी  जो सड़क पर रहने वाले गरीब मनोरोगियों के संरक्षण के लिए काम करता है। सोनम वांगचुक को आर्थिक प्रगति के लिए विज्ञान और संस्कृति का रचनात्मक उपयोग करते हुए लद्दाखी युवाओं की जिंदगी सुधारने के लिए जाना जाता है। सोनम वांगचुक ने 1988 में एनआईटी श्रीनगर से इंजीनियरिंग करने के बाद स्टूडेंट्स एजुकेशन ऐंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओेएल) बनाई। इसके ज़रिए लद्दाखी छात्रों को कोचिंग दी गई। उन्होंने वर्ष 1994 में ‘ऑपरेशन न्यू होप’ शुरू किया जिसके बाद 10वीं के रिजल्ट में सुधार हुआ।

अन्य विजेताओं में कंबोडिया के यूक छांग, पूर्वी तिमोर के मारिया डी लॉर्डेस मार्टिन्स क्रूज़, फिलीपींस के हॉवर्ड डी और वियतनाम के वो थिय होआंग येन शामिल हैं।

रेमन मैगसेसे पुरस्कार:

रेमन मैगसेसे पुरस्कार या रमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिये प्रदान किया जाता है। इसे प्राय: एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। यह रेमन मैगसेसे पुरस्कार फाउन्डेशन द्वारा फ़िलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रेमन मैगसेसे की याद में दिया जाता है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष मैग्सेसे जयंती पर 31 अगस्त को लोक सेवा, सामुदायिक सेवा, पत्रकारिता, साहित्य तथा सृजनात्मक कला और अंतर्राष्ट्रीय सूझबूझ के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार ग़ैर एशियायी संगठनों, संस्थानों को भी एशिया के हित में कार्य करने के लिए दिया जा सकता है।