यूरोप में नया डेटा प्रोटेक्शन कानून GDPR लागू

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यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्युलेशन (जीडीपीआर) 25 मई 2018 से लागू हो गए हैं, जिसका पालन यूरोपीय संघ के सभी 28 देशों में काम करने वाली कंपनियों के लिए अनिवार्य हो गया है। इस नियम के उल्लंघन की स्थिति में कंपनी के सालाना टर्नओवर का 4% हिस्सा या 20 मिलियन यूरो (करीब 160 करोड़ रुपये), जो भी ज्यादा होगा, का जुर्माना लगाया जाएगा।

GDPR का निर्माण यूरोपीय पार्लियामेंट एंड काउंसिल द्वारा आम आदमी के डाटा की सुरक्षा के लिए किया गया है। GDPR के तहत नागरिकों की मूल पहचान से जुड़ी जानकारियों जैसे किसी व्यक्ति का नाम, पता और आइडी की सुरक्षा की जाएगी। इसमें ग्राहक या उपयोगकर्ता अपने ऑनलाइन डेटा का खुद मालिक होगा।

मई 2016 में GDPR के नियम बनाये गये थे जो कि यूरोपीय संघ के 1995 के डेटा प्रोटेक्शन डायरेक्टिव रेग्युलेशन नियम का स्थान लेंगे। नए नियमों के तहत जिस डेटा की मॉनिटरिंग की जाएगी उसमें न सिर्फ नाम, लिंग ई-मेल एड्रैस जैसे यूजर्स की ओर से स्वयं साझा की गई जानकारी शामिल होगी बल्कि कुकीज की बैकग्राउंड ट्रैकिंग और ब्राउजर हिस्ट्री जैसी जानकारी भी इसके रडार में आएगी। कंसल्टिंग फर्म डेलॉयट की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां तक कि लोकेशन डेटा, आईपी एड्रैस, आइडेंटिफायर जैसे जेनेटिक, मानसिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या किसी व्यक्ति कि सामाजिक पहचान को भी स्पष्ट रुप से पर्सनल डेटा में शामिल किया गया है।