यूनेस्को ने कैलास भू-क्षेत्र को विश्व धरोहर की अंतरिम सूची में शामिल किया

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यूनेस्को ने कैलास भू-क्षेत्र को विश्व धरोहर की अंतरिम सूची में भी शामिल कर लिया है। पवित्र कैलास भू-क्षेत्र भारत सहित चीन व नेपाल की संयुक्त धरोहर है। अब इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

अंतरिम सूची में स्थान मिल जाने के बाद, नियमानुसार विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद एक मुख्य प्रस्ताव बनाकर यूनेस्को को भेजा जाता है और फिर इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाता है। इस पहल का असर यह होगा कि राष्ट्रीय महत्त्व वाले इस क्षेत्र को प्राकृतिक के साथ ही सांस्कृतिक (मिश्रित) श्रेणी की संरक्षित धरोहर का दर्जा मिलेगा।

गौरतलब है कि कैलास क्षेत्र को संरक्षित विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिये चीन व नेपाल पहले ही अपना प्रस्ताव यूनेस्को को भेज चुके थे। भारत ने भी अपने भूभाग के 7120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को यूनेस्को से प्रारंभिक मंज़ूरी प्रदान करा दी है। अब विभिन्न देशों का 31 हज़ार 175 वर्ग किलोमीटर भाग यूनेस्को की अंतरिम सूची में शामिल हो गया है।

कैलास मानसरोवर:

कैलास मानसरोवर के लिए भारत में कुल यात्रा मार्ग 1433 किलोमीटर का है। कैलास यात्रा के लिए भारत में परंपरागत मार्ग ब्रह्मदेव (टनकपुर) से शुरू हो कर सेनापति, चंपावत, रामेश्वर, गंगोलीहाट और पिथौराघाट से लिपुलेख तक जाता है। इस क्षेत्र में अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य और जैवमंडल रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र आते हैं। इसके अलावा, अनेक हिंदू तीर्थ स्थल और बौद्ध स्थल भी इस मार्ग में आते हैं जो इसे और महत्वपूर्ण बनाते हैं। अपने धार्मिक मूल्य और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाने वाली कैलास यात्रा का आयोजन विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों – लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड), और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) से करता है। इस पवित्र इलाके के दायरे में भारत का 6,836 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है। इस इलाके में चार जल नदियां भी आती हैं जो क्रमश: पानार सरयू, सरयू रामगंगा, गोरी काली और धौली काली हैं। यहां करीब 50 प्रतिशत वन क्षेत्र, 22 प्रतिशत कृषि क्षेत्र और 10 प्रतिशत गैर कृषि क्षेत्र है। इस क्षेत्र की मुख्य बोली कुमाउंनी, बेयांसे, भोंटिया, हुनिया, हिन्दी और नेपाली हैं। यहां लगभग 1200 प्रकार की पादप प्रजातियां, 38 प्रकार के स्तनधारी प्राणियों, 191 तरह के पक्षियों की प्रजातियां तथा करीब 90 प्रकार की मछलियों की प्रजातियां पायी जाती हैं।