मधुमक्‍खी पालन विकास समिति की रिपोर्ट

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हाल ही में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के तहत गठित मधुमक्‍खी पालन विकास समिति (Beekeeping Development Committee- BDC) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस समिति का गठन प्रो. देबरॉय की अध्‍यक्षता में किया गया है।

BDC का उद्देश्य भारत में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के नए तौर तरीकों की पहचान करना है जिससे कृषि उत्पादकता, रोज़गार सृजन और पोषण सुरक्षा बढ़ाने तथा जैव विविधता को बनाए रखने में मदद मिल सके।

समिति की सिफारिशें:

  • मधुमक्‍खियों को कृषि उत्‍पाद के रूप में देखा जाना चाहिये तथा भूमिहीन मधुमक्‍खी पालकों को किसान का दर्जा दिया जाना चाहिये।
  • मधुमक्खियों की पंसद वाले पौधों को सही स्‍थानों पर लगाना चाहिये तथा ऐसे बागानों का प्रबंधन महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाए।
  • राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड को संस्थागत रूप दिया जाए तथा कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय के तहत इसे शहद और परागण बोर्ड का नाम दिया जाए। ऐसा निकाय कई तंत्रों के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
  • इसमें नए एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्रों की स्थापना, उद्योग से जुड़े लोगों को और ज्‍यादा प्रशिक्षित करना, शहद की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिये एक कोष का गठन तथा मधुमक्‍खी पालन के महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर डेटा संग्रह जैसी बातें शामिल होंगी।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्त्वावधान में उन्नत अनुसंधान के लिये एक विषय के रूप में मधुमक्‍खी पालन को मान्यता दी जाए।
  • मधुमक्‍खी पालकों का राज्‍य सरकारों द्वारा प्रशिक्षण और विकास की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिये।
  • शहद सहित मधुमक्खियों से जुड़े अन्‍य उत्‍पादों के संग्रहण, प्रसंस्‍करण और विपणन के लिये राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय स्‍तर पर अवसंरचनाओं का विकास किया जाए।
  • शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिये प्रक्रियाओं को सरल बनाने और स्पष्ट मानकों को निर्दिष्ट करने की आवश्यकता है।

BDC की रिपोर्ट के अनुसार मधुमक्‍खी पालन को केवल शहद और मोम उत्‍पादन तक सीमित रखे जाने की बजाए इसे परागणों,मधुमक्‍खी द्वारा छत्‍ते में इकठ्ठा किये जाने वाले पौध रसायन,रॉयल जेली और मधुमक्‍खी के डंक में युक्‍त विष को उत्‍पाद के रूप में बेचने के लिये भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है जिससे भारतीय किसान काफी लाभान्वित हो सकते हैं। इसके अलावा, 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में भी मधुमक्खी पालन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।