बाल विवाह के मामलों में त्रिपुरा दूसरे स्थान पर

0
137

हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा वाल विवाह से सम्बन्धित रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में से त्रिपुरा बाल विवाह के मामलों में दूसरे स्थान में है। इस अध्ययन में पाया गया कि त्रिपुरा में 15 से 19 वर्ष के आयु में सर्वाधिक बाल विवाह पाया गया है। ऑक्सफोर्ड के इस अध्ययन को ‘यंग लाइव्स-एन इंटरनेशनल स्टडी ऑन चाइल्डहुड पॉवर्टी’ नाम दिया गया है।

प्रमुख तथ्यः

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के इस अध्ययन में कहा गया है कि 15 से 19 वर्ष की आयुवर्ग की कन्याओं का विवाह राष्ट्रीय औसत 11.9 प्रतिशत है जबकि त्रिपुरा में यह औसत 21.6 फीसदी है।

ऑक्सफोर्ड की इस रिपोर्ट में यह भी बात सामने आयी है कि त्रिपुरा के धलाई जिले में सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं जिसका प्रतिशत 24.7 फीसदी है। त्रिपुरा में उच्च बाल विवाह प्रसार वाले जिलों में त्रिपुरा, उत्तरी त्रिपुरा, और पश्चिमी त्रिपुरा शामिल हैं।

इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि किशोरावस्था में मां बनने वाली लड़कियों से पैदा होने वाले बच्चों की संख्या के विश्लेषण पर यह पाया गया कि 52 फीसदी विवाहित किशोर लडकियां कम से कम एक बच्चे को जन्म दे ही देती हैं। जबकि 5.5 फीसदी किशोर लड़कियों दो बच्चों को जन्म दिया था।

भारत में बाल विवाहः

भारत में बाल विवाह काफी मात्रा में व्याप्त है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के मुताबिक देश में बाल विवाह की औसत दर 11.9 फीसदी है। इस मामले में हिमाचल प्रदेश और मणिपुर में कुछ वृद्धि दर्ज की गई थी।

एनएफएचएस-3 (2005-06) के आंकड़ों के एनएफएचएस-4 (2015-16) के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के आंकड़ों में काफी सुधार देखने को मिला है। बाल विवाह के मामलें में उत्तर प्रदेश में 29 फीसदी से घटकर 6.4 फीसदी रह गई है। इसके अलावा इस मामले में पश्चिम बंगाल में भी सुधार देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में 34 फीसदी से घटकर बाल विवाह का औसत 25.6 फीसदी हो गया है।

ध्यान देने योग्य है कि भारत ही नहीं दुनियाभर के लगभग सभी देशों में बाल विवाह एक जघन्य अपराध माना जाता है। भारत में बाल विवाह निधेष अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह दण्डनीय अपराध है। इसमें 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों का विवाह करने पर दो वर्ष की जेल की सजा तथा 1 लाख रूपये जुर्माने का प्रावधान है। कानून के अनुसार ऐसे विवाह में हिस्सा लेने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्यवाई की जा सकती है।