बालकृष्ण दोशी को प्रित्ज़कर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा

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भारत के मशहूर आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोशी को नोबल पुरस्कार के समान माने जाने वाले प्रतिष्ठित ‘प्रित्ज़कर’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मई में टोरंटो में यह सम्मान दिया जाएगा। यह पुरस्कार आर्किटेक्चर क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के संदर्भ में दिया जाता है। ‘प्रित्ज़कर’ पुरस्कार को वास्तुकला की दुनिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • दोशी को यह पुरस्कार कम लागत के घर डिज़ाइन करने के लिये दिया जा रहा है।
  • 90 साल के बालकृष्ण पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
  • बालकृष्ण दोशी ने हमेशा ऐसी संजीदा वास्तुकलाओं का निर्माण किया है। उनके डिज़ाइन न तो भड़कीले होते है, न ही चटख। उनके डिज़ाइन हमेशा आम चलन से अलग रहे हैं।
  • ज्यूरी के अनुसार, बालकृष्ण द्वारा हमेशा यह स्पष्ट किया गया है कि अच्छी वास्तुकला और शहरी योजना में उद्देश्य एवं ढाँचे के साथ-साथ इसे बनाने के समय, जलवायु, स्थान, तकनीक, कारीगरी तथा हस्तकला का भी ध्यान रखना चाहिये।

‘प्रित्ज़कर’ पुरस्कार:

यह किसी जीवित वास्तुकार को उसके विश्वस्तरीय योगदान के लिये दिया जाता है। वास्तुकला के नोबल पुरस्कार के रूप में प्रसिद्ध इस पुरस्कार को वर्ष 1979 से प्रदान किया जा रहा है। इसकी स्थापना जे. प्रित्ज़कर द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार प्रित्ज़कर परिवार एवं हयात फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। प्रथम ‘प्रित्ज़कर’ पुरस्कार वर्ष 1979 में ग्लास हाउस के वास्तुकार फिलीप जोंसन को दिया गया था।