फ्लाई ऐश के बेहतर प्रबंधन हेतु ‘ऐश ट्रैक’ मोबाइल ऐप लांच

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हाल ही में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा एक वेब आधारित निगरानी प्रणाली फ्लाई ऐश मोबाइल एप ‘ऐश ट्रैक’ लॉन्च की गई है। यह प्लेटफार्म ताप बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पादित ऐश के बेहतर प्रबंधन में सहायक होगा क्योंकि यह फ्लाई ऐश उत्पादकों (ताप बिजली संयंत्र) तथा सड़क ठेकेदारों, सीमेंट संयंत्रों जैसे संभावित उपयोगकर्त्ताओं के बीच सेतु का काम करेगा।

विशेषताएं:

  • एनड्रॉएड ओएस के लिए गूगल प्ले स्टोर से तथा एप्पल आईओएस के लिए ऐप स्टोर से यूजर ऐश ट्रैक मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते है।
  • यह ऐप एक निश्चित स्थान से 100 किलोमीटर तथा 300 किलोमीटर के दायरे में स्थापित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को दिखाता है।
  • यूजर जहां से फ्लाई ऐश लेना चाहता है उस पावर स्टेशन का चयन कर सकता है।
  • ऐश उपलब्धता, यूजर के स्थान से दूरी, सम्पर्क व्यक्ति के ब्योरे प्रदर्शित होंगे।
  • यूजर ऐश आबंटन के लिए ऑन लाइन आवेदन कर सकते हैं।
  • एसएमएस फौरन आवेदन तथा संबंधित बिजली संयंत्रों को भेजा जाएगा।
  • ऐप से बिजली संयंत्र से 100 किलोमीटर और 300 किलोमीटर के दायरे में संभावित ग्राहको को दिखाता है।
  • बिजली स्टेशन बिजली संयंत्र के आस-पास के संभावित ऐश उपयोगकर्ताओं जैसे सीमेंट संयंत्र, एनएचएआई, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) परियोजनाए ईट निर्माता आदि को दिखा सकते है।
  • बिजली संयंत्र ऐश सप्लाई के लिए संभावित ऐश उपयोगकर्ताओं से संपर्क कर सकते हैं।
  • यह ऐप देश में संयंत्रवार, उपयोगिता के अनुसार तथा राज्यवार ऐश उपयोग की स्थिति प्रदान करता है।

फ्लाई ऐश:

फ्लाई ऐश (Fly ash) बहुत सी चीज़ों (जैसे कोयला) को जलाने से निर्मित महीन कणों से बनी होती है। यहाँ यह जानना बेहद महत्त्वपूर्ण है कि फ्लाई ऐश में सिलिकन डाईआक्साइड और कैल्सियम आक्साइड बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है। यह निर्माण उद्योग के कार्यों में संसाधन सामग्री के रूप में काम आता है और फिलहाल इसका इस्तेमाल पोर्टलैंड सीमेंट बनाने, ब्रिक्स/ब्लाक/टाइल्स निर्माण सड़क तटबंध निर्माण और निचले क्षेत्रों के विकास कार्यों में किया जा रहा है।

फ्लाई ऐश का उचित प्रबंधन न केवल पर्यावरण के लिये महत्त्वपूर्ण है बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पादित ऐश ज़मीन का बड़ा हिस्सा घेरती है। वर्तमान में लगभग 63 प्रतिशत फ्लाई ऐश का उपयोग किया जाता है, भविष्य में इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।