प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक नामवर सिंह का निधन

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19 फरवरी 2019 को हिंदी के विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह का निधन दिल्ली में हो गया। नामवर सिंह ने अपने जीवन की अंतिम सांस एम्स में ली। वे 93 साल के थे।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केन्द्र की स्थापना करने और हिंदी साहित्य को एक नये मुकाम तक ले जाने में उनका योगदान सर्वदा सराहनीय रहा है।

नामवर सिंह से संबंधित कुछ तथ्‍य:

  • नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1926 में बनारस जिले के जीयनपुर गांव में हुआ था। उन्होंने साहित्य लेखन की शुरूआत काव्य से की थी। उनकी पहली कविता वर्ष 1941 में ‘क्षत्रियमित्र’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
  • नामवर सिंह ने वर्ष 1949 में काशी हिन्दू विश्वविद्लालय से स्नातक तथा 1951 में वहीं से परास्नातक किया था। नामवर सिंह ने बीएचयू से ही हिंदी साहित्य पीएचडी की थी।
  • नामवर सिंह लंबे अर्से से एक प्रतिष्ठित आलोचक और समीक्षक के रूप में जाने जाते रहे हैं। उनके द्वारा लिखित कई पुस्तकें लोकप्रिय हैं जिसमें छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा इत्यादि।
  • नामवर सिंह की आलोचना में किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, कहानी नई कहानी, इतिहास और आलोचना, दूसरी परंपरा की खोज, कविता के नये प्रतिमान, वाद विवाद संवाद अत्यधिक प्रसिद्ध हैं जबकि उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी हिन्दी साहित्य जगत में अत्यधिक लोकप्रिय है।
  • नामवर सिंह जी को हिन्दी साहित्य में अद्वितीय योगदान हेतु कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है जिसमें साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य अकादमी सम्मान भी शामिल है।
  • नामवर सिंह ने साहित्य में योगदान के अलावा लंबे अर्से तक अध्यापन कार्य भी किया। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक अध्यापन का काम किया।
  • नामवर सिंह वर्ष 1993 से 1996 तक राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन के अध्यक्ष भी रहे थे। उन्होंने हिन्दी की दो पत्रिकाओं का भी संपादन किया जिसमें जनयुग और आलोचना नामक पत्रिका शामिल है।