प्रधानमंत्री ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन किया

0
10

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 9 नवंबर, 2019 को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया तथा भारतीय 500 तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को भी रवाना किया। इस जत्थे में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल तथा नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल हैं।

अमृतसर से डेरा बाबा नानक को जोड़ने वाले गुरदासपुर राजमार्ग पर 4.2 किलोमीटर लंबा 4 लेन की सड़क 120 करोड़ रुपये की लागत से बनायी गई है।

15 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है। यह भवन पूरी तरह वातानुकूलित है जहां रोजना लगभग 5,000 तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 50 से अधिक अव्रजन काउंटर हैं। इसके मुख्य भवन के अन्दर ओर कियोस्क, शौचालय, बच्चों की देखभाल की व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, प्रार्थना कक्ष और स्नैक्स काउंटर जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

सीसीटीवी निगरानी और जनसंबोधन प्रणाली के साथ सुरक्षा के लिए दमदार बुनियादी ढांचे की स्थापना की गई है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 300 फीट का एक राष्ट्रीय स्मारक ध्वज भी फहराया जा रहा है।

इस समझौते पर पाकिस्तान के साथ 24 अक्टूबर को हस्ताक्षर किये गए। यह करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन के लिए एक औपचारिक ढांचा प्रदान करता है। समझौते की मुख्य बातें हैं:–

  • सभी धर्मों के भारतीय तीर्थयात्री और भारतीय मूल के व्यक्ति इस कॉरिडोर का उपयोग कर सकते हैं।
  • यात्रा वीज़ा मुक्त होगी।
  • तीर्थयात्रियों को केवल एक वैध पासपोर्ट ले जाने की आवश्यकता है।
  • भारतीय मूल के व्यक्तियों को अपने देश के पासपोर्ट के साथ ओसीआई कार्ड ले जाने की आवश्यकता होगी।
  • कॉरिडोर सुबह से शाम तक खुला रहेगा और सुबह यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन वापस लौटना होगा।
  • यह कॉरिडोर निर्धारित दिनों (जिसकी सूचना पहले दे दी जाएगी) को छोड़कर पूरे वर्ष के लिए चालू रहेगा।
  • तीर्थयात्रियों के पास अकेले या समूहों में यात्रा करने का विकल्प होगा और वे पैदल यात्रा भी कर सकेंगे।
  • भारत, यात्रा की तारीख से 10 दिन पहले तीर्थयात्रियों की सूची पाकिस्तान को भेजेगा।
  • पाकिस्तान पक्ष ने भारत को ‘लंगर’ और ‘प्रसाद’ के वितरण के लिए पर्याप्त प्रावधान का आश्वासन दिया है।

गुरुद्वारा दरबार साहिब:

यह 16वीं शताब्दी का गुरुद्वारा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवल जिले में स्थित है। यह पाकिस्तान के पंजाब में भारत-पाक सीमा से 3-4 किलोमीटर दूर स्थित है। इसकी स्थापना सिख धर्म के पहले गुरु द्वारा 1522 में की गयी थी। यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए काफी महत्वपूर्ण है, गुरु नानक देव ने इस स्थान पर सिख समुदाय को एकत्रित किया, वे इस स्थान पर 18 वर्षों तक रहे।