प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात के सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितम्बर को गुजरात के केवाडि़या में सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। इस बांध परियोजना पर करीब साठ हजार करोड़ रूपये खर्च हुए हैं। लोगों के विस्थापन को लेकर इस बांध पर काफी विवाद हुआ था। परियोजना का उद्देश्य करीब दस लाख किसानों और विभिन्न गांवों और कस्बों को पेयजल की आपूर्ति करना है।

ये प्रोजेक्ट सरदार वल्लभ भाई पटेल का सपना था कि गुजरात का किसान पानी की किल्लत की वजह से अपनी पूरी फसल नही ले पाता है, उसे इस बांध से फायदा मिले। सरदार पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बनाने की पहल 1945 में की थी। साल 1959 में बांध के लिए औपचारिक प्रस्ताव बना। बाद में सरदार सरोवर बांध की नीव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रैल, 1961 में रखी थी।

राज्यों के बीच विवाद होने पर गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच नवंबर 1963 में समझौता हुआ और सितंबर 1964 में डॉ. ए.एन खोसला ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जुलाई 1968 में गुजरात ने अंतर राज्यीय जल विवाद कानून के तहत पंचाट (ट्रिब्यूनल) गठित कराने की मांग की, जिसके बाद साल 1969 में अक्टूबर महीने में नर्मदा जल विवाद पंचाट बना। 12 जुलाई 1974 को गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट और गुजरात के बीच बांध को लेकर समझौता हुआ।

1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बांध की ऊंचाई 80.3 मीटर से अधिक करने पर रोक लगाई लेकिन 19-99 में बांध को 85 मीटर तक ऊंचा बनाने की अनुमति दे दी गई।

8 मार्च 2006 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 121.92 मीटर करने की अनुमति दी। मार्च 2008 में बांध से निकलने वाली मुख्य नहर राजस्थान तक पहुंची। इसके बाद साल 2014 में नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी ने इस बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए आखिरी क्लीयरेंस दिया और इस बाद इसकी ऊंचाई को 121.92 मीटर से बढ़ाकर 138.68 मीटर (455 फीट) कर दिया गया। इसके बाद 17 जून 2017 को नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी ने 16 जून को डैम के सभी 30 गेट बंद करने आदेश दिया

इस बांध को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर लगातार विरोध करती रही हैं। उन्होंने साल 1985 में उन्होंने ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत की थी जो अब तक जारी है। इस आंदोलन का मकसद बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 138 मीटर किए जाने से मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी के 192 गांवों और इनमें बसे 40 हजार परिवार प्रभावित होने वाले हैं। खबरों के मुताबिक पुनर्वास के लिए जहां नई बस्तियां बसाने की तैयारी चल रही है, वहां सुविधाओं का अभाव है। मेधा इनके पुनर्वास के बेहतर इंतजाम की मांग को लेकर आंदोलन करती रही हैं।

सरदार सरोवर बांध: एक दृष्टि

  • सरदार सरोवर बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।
  • कुल लागत के हिसाब से भारत की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है।
  • सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर बना है।
  • चीन के सिचुआन में बना जिनपिंग-क दुनिया का सबसे ऊंचा बांध है
  • इस विवाद पर साल 2002 में  डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘ड्रोन्ड आउट’ (Drowned Out) भी बन चुकी है। जिसकी कहानी एक आदीवासी परिवार पर आधारित है जो नर्मदा बांध के लिए रास्ता देने की जगह वहीं रहकर डूबकर मरने का पैसला करता है। इससे पहले साल 1995 में भी इस पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनी थी जिसका नाम था ‘नर्मदा डायरी’।