प्रथम हाइपरलूप पैसेंजर कैप्सूल का अनावरण किया गया

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हाल ही में दुनिया के सबसे पहले हाइपरलूप पैसेंजर कैप्सूल का अनावरण स्पेन में किया गया। वाणिज्यिक ट्रैक पर इस्तेमाल करने से पहले 105 फीट लंबी और 5 टन वजनी कैप्सूल को अतिरिक्त असेंबली के लिये फ्राँस के टूलूज़ ले जाया जाएगा। क्विंटरो नामक इस कैप्सूल को पूरी तरह कम्पोज़िट मैटेरियल से बनाया गया है। इस कैप्सूल का निर्माण कैलिफोर्निया स्थित स्टार्ट अप, जिसे हाइपरलूप-टीटी के नाम से भी जाना जाता है, ने किया है।

वर्तमान में कई कंपनियों द्वारा विकसित किया जा रहा हाइपरलूप ज़मीनी यातायात का एक नया रूप है। इसमें कम दबाव वाले ट्यूबों के भीतर हवा में तैरती हुई बोगी में 700 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से यात्रा करने वाले यात्रियों को देखा जा सकेगा। इसे ‘यातायात के पाँचवें माध्यम’ के रूप में जाना जाता है। इसकी न केवल तीव्र गति होगी बल्कि यह शून्य-उत्सर्जन के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। इस विचार की कल्पना सबसे पहले स्पेस एक्स के इलोन मस्क द्वारा की गई थी। 

इस तकनीक के लिये कम ऊर्जा की आवश्यकता होगी और खराब मौसम के साथ-साथ टक्कर से बचने के लिये इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली भी होगी। इसे कॉनकॉर्ड, रेल गन तथा एयर हॉकी टेबल के मिश्रण के रूप में माना जाता है।

हाइपरलूप चुंबकीय ढंग से हवा में तैरते हुए बहुत तीव्र गति से संचालित होता है। ये कैप्सूल यात्रियों को ट्यूब या सुरंगों के माध्यम से ले जाते हैं, जिनमें से अधिकांश वायु को घर्षण कम करने के लिये हटा दिया जाता है। वायु को हटाने की वज़ह से सुरंग का दबाव कम हो जाता है। कम हो चुका यह दबाव कैप्सूल को तीव्र गति प्रदान करता है।