पृथ्वी-II मिसाइल का सफल परीक्षण

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भारत ने पृथ्वी-II मिसाइल का 6 अक्टूबर को सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण एक मोबाइल लॉन्चर के जरिए ओड़िशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया। यह पृथ्वी-II मिसाइल का रात्रिकालीन संस्करण था। इस मिसाइल की सबसे खास बात यह है कि यह रात के अंधेरे में भी दुश्मन को अपना निशाना बना सकती है। यह मिसाइल सामरिक दृष्ट से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस परीक्षण से भारत ने एक बार फिर मिसाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। कुछ दिन पहले ही भारत ने ओडिशा तट पर एक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इसके साथ भारत ने दो परतों वाली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली थी।

पृथ्वी-II मिसाइल: एक दृष्टि

  • स्वदेशी तकनीक से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।
  • सतह से सतह तक मार करने में सक्षम है।
  • परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
  • मारक क्षमता 350 किलोमीटर है।
  • 500 से लेकर 1000 किलोग्राम तक युद्ध सामाग्री ले जाने में सक्षम है।
  • तरल और ठोस दोनों तरह के ईंधन पर चल सकती है।

 

डीआरडीओ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन काम करता है। डीआरडीओ रक्षा प्रणालियों के डिजाइन एवं विकास के लिए समर्पित है और तीनो रक्षा सेवाओं की अभिव्यक्त गुणात्मक आवश्यकताओं के अनुसार  विश्व स्तर के हथियार प्रणालियों और उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। डीआरडीओ सैन्य प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिसमें वैमानिकी, शस्त्रों, संग्राम वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग प्रणालियों, मिसाइल, सामग्री,  नौसेना प्रणालियों, उन्नत कंप्यूटिंग, सिमुलेशन और जीवन विज्ञान शामिल है। डीआरडीओ अत्याधुनिक आयुध प्रौद्योगिकी की आवश्यकतापूर्ति के साथ-साथ समाज के लिए स्पिनऑफ लाभ देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है।