नासा ने धूमकेतुओं के एकजुट होकर नया ग्रह बनाने का पता लगाया

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वैज्ञानिकों ने नासा की दूरबीन का इस्तेमाल करते हुए सूर्य और प्लूटो के बीच की दूरी से कम से कम तीन गुना दूर धूमकेतुओं के एकजुट होकर नया ग्रह बनाने का पता लगाया है।

अमरीका स्थित जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी एप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी में ग्रहीय वैज्ञानिक केरी लिजे के मुताबिक धूमकेतुओं के छल्ले से निकलने वाले प्रकाश का अनुमान लगाए जाने पर यह जाहिर हुआ है कि इनमें से हर एक पृथ्वी के आकार के कुछ ग्रहों का विकास कर रहा है।

दरअसल, वैज्ञानिकों ने धूमकेतुओं के घने छल्लों को देखा है। इन रिंगों (छल्लों) में पाये जाने वाले पदार्थ की संरचना बर्फ से समृद्ध (आइस-रिच) (फ़ॉमलहाट और एचडी 32297 सिस्टम्स में देखा गया) से लेकर बिना बर्फ है लेकिन यह कार्बन से समृद्ध (एचआर 4796 ए सिस्टम) हैं।

वैज्ञानिकों को एचआर 4796 ए के आसपास के लाल धूल वाले छल्ले को लेकर विशेष रूप से उत्सुकता है, जो एक शिशु सौर प्रणाली (सोलर इन्फेंट सिस्टम) के लिए असामान्य रूप से कठिन अवस्था को दर्शाता है।

धूमकेतु:

धूमकेतु सौरमण्डलीय निकाय है जो पत्थर, धूल, बर्फ और गैस के बने हुए छोटे-छोटे खण्ड होते है। यह ग्रहों के समान सूर्य की परिक्रमा करते है। छोटे पथ वाले धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा एक अण्डाकार पथ में लगभग 6 से 200 वर्ष में पूरी करते है। कुछ धूमकेतु का पथ वलयाकार होता है और वो मात्र एक बार ही दिखाई देते है। लम्बे पथ वाले धूमकेतु एक परिक्रमा करने में हजारों वर्ष लगाते है। अधिकतर धूमकेतु बर्फ, कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया तथा अन्य पदार्थ जैसे सिलिकेट और कार्बनिक मिश्रण के बने होते है।