नासा का खोजी यान ‘कासिनी’ शनि से टकराकर नष्ट हुआ

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) का खोजी यान ‘कासिनी’ 15 सितम्बर को नष्ट गया। कासिनी को शनि ग्रह और उसके रहस्मय वलयों तथा चंद्रमाओं की अहम जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया था।

कासिनी ने 11 लाख 30 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार के साथ शनि के वायुमंडल में प्रवेश किया और चंद सेकेडों में जलकर नष्ट हो गया। तीन अरब डॉलर के इस यान को जानबूझकर शनि के वायुमंडल में प्रवेश कराया गया क्योंकि वैज्ञानिकों का ऐसा मानना था कि ईंधन खत्म हो चुके इस यान को अगर यूं ही छोड़ दिया जाता तो उसके शनि के चंद्रमा टाइटन या फिर पॉलीड्यूसेस से टकराने की आशंका थी।

पृष्ठभूमि:       

वर्ष 1997 में लॉन्च हुआ ‘कासिनी मिशन’ नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी का एक संयुक्त मिशन है। तब से लेकर अब तक इसने चक्राकार ग्रह और इसके उपग्रहों से संबंधित कई अभूतपूर्व चित्र पृथ्वी पर भेजें हैं तथा उनके चन्द्रमाओं से संबंधित अनेक खोजें भी की हैं।

मिशन के उद्देश्य:

  • शनि ग्रह के छल्लों की त्रिविमीय आकृति और उनके गतिशील व्यवहार का निर्धारण करना।
  • उपग्रह की सतहों और पृथ्वी की प्रत्येक वस्तु के भू-वैज्ञानिक इतिहास के संगठन का निर्धारण करना।
  • आइपेटस (Iapetus) के अग्रणी गोलार्द्ध में उपस्थित काले पदार्थ (dark material) की उत्पत्ति और स्वरूप का निर्धारण करना।
  • चुम्बकीय क्षेत्र (magnetosphere) की त्रिविमीय संरचना और गतिशील व्यवहार का मापन करना।
  • बादलों के स्तर (cloud level) पर शनि ग्रह के वायुमंडल के गतिशील व्यवहार का अध्ययन करना।
  • टाइटन के बादलों और धूल के समय के साथ परिवर्तित होते स्वरूप का अध्ययन करना।
  • क्षेत्रीय स्केल पर टाइटन की सतह की विशेषताओं का अध्ययन करना।

कासिनी: एक दृष्टि

  • 15 अक्टूबर, 1997 में अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित अंतरिक्ष केन्द्र से भेजा गया था।
  • कासिनी ने 30 जून, 2004 को शनि की कक्षा में प्रवेश किया था।
  • कासिनी ने अंतरिक्ष में 9 अरब किमी की लंबी यात्रा की।
  • उसने शनि के सात नए चंद्रमाओं (उपग्रह) मिथोन, पैलीन, पॉलीड्यूसेस, डैफनिस, एंथे, ऐगियोन और एस 2009 की खोज की।
  • शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन पर तरल मिथेन के समुद्र होने का पता लगाया।
  • वर्ष 1998 में वह शुक्र ग्रह के करीब से गुजरा और उसके गुरुत्वाकर्षण की जानकारी जुटाई।
  • वर्ष 2000 में उसने वृहस्पति ग्रह के करीब से गुजरते हुए उसकी 26 हजार तस्वीरें उतारीं।