नमामि गंगे कार्यक्रम को सुदढ़ बनाने हेतु GIS तकनीक का उपयोग

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने 04 मई 2018 को भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) प्रौद्योगिकी का उपयोग करके गंगा कायाकल्प कार्य को पूरा करने के उद्देश्य से 1767 में गठित भारत के सबसे पुराने विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग को अपने साथ जोड़ा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 86.84 करोड़ रूपये है।

 नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए GIS प्रोद्यौगिकी:

  • इस परियोजना में डिजीटल इलिवेशन मॉडल (डीईएम) प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है जो सटीक आंकड़ा संग्रह सुनिश्चित करता है।
  • यह नदी-बेसिन प्रबंधन योजना का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। डीईएम प्रौद्योगिकी पूरे क्षेत्र की स्थलाकृति की पहचान करता है।
  • इससे नीति निर्माता आसानी से उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर सकते हैं। इस प्रकार यह नीति निर्माण प्रक्रिया को सहायता प्रदान करता है।
  • इस तकनीक से महत्त्वपूर्ण स्थानों की पहचान की जा सकती है। GIS प्रोद्योगिकी का उपयोग विकेंद्रीकरण भी सुनिश्चित करेगा।
  • संग्रह किये गए आंकड़ों तथा सरकार द्वारा उठाए गये कदमों की जानकारी पोर्टल और मोबाईल एप के माध्यम से स्थानीय लोगों के साथ साझा की जा सकती है। इस प्रकार यह आपसी संवाद सुलभ करेगा तथा एक पारदर्शी मंच साबित होगा।
  • प्रभावी निर्वहन प्रबंधन के लिए औद्योगिक, व्यावसायिक और सभी अन्य प्रकार की संस्थाओं से निकलने वाले सीवेज की मैपिंग की जाएगी।
  • GIS प्रोद्यौगिकी से नदी के दोनों किनारों पर प्रस्तावित उच्च क्षमता वाली संरक्षित क्षेत्रों के नियमन में सहायता मिलेगी।