जेनेवा समझौता के प्रमुख तथ्‍य

0
162

हाल ही में पुलवाना हमले के उपरांत चर्चा में रहने वाला जिनेवा कन्वेंशन या समझौता युद्धबंदियों के संबंध में है। यदि युद्ध या लड़ाई के दौरान कोई भी सैन्य अधिकारी या जवान शत्रु देश की सीमा में दाखिल हो जाता है तो उसकी गिरफ्तारी की सूरत में उसे युद्धबंदी माना जाता है। युद्धबंदियों के संबंध में जेनेवा के व्यापक विचार कर कुछ नियम बनाये हैं जिसको जिनेवा कन्वेंशन के नाम से जाना जाता है।

जिनेवा कन्वेंशन के तहत यदि किसी भी देश का जवान व अधिकार दुश्मन देश की सीमा पर दाखिल हो जाता है तो उसकी गिरफ्तारी के बाद दुश्मन देश उसके साथ किसी भी प्रकार का अमानवीय बर्ताव नहीं कर सकता है। ना तो उस युद्धबंदी को डराया जा सकता है और न ही उसे किसी भी प्रकार से अपमानित किया जा सकता है।

जिनेवा कन्वेंशन के तहत एक विकल्प यह भी है कि युद्ध या लड़ाई के बाद युद्धबंदी को उसके देश को वापस लौटा दिया जाये। इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है परन्तु कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता है। युद्धबंदियों से दुश्मन देश सिर्फ उनका नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है।

जिनेवा कन्वेंशन कई बार अपडेट हुआ:

  1. पहला जिनेवा समझौता वर्ष 22 अगस्त 1864 में हुआ था।
  2. दूसरा जिनेवा समझौता 1906 में हुआ था।
  3. तीसरा समझौता वर्ष 1929 में हुआ था।
  4. चौथा जिनेंवा कन्वेशन दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 12 अगस्त 1949 में हुआ था।

युद्ध के दौरान भी मानवीय मूल्यों को बनाये रखने हेतु जिनेवा समझौता पर हस्ताक्षर किये गये थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1949 में जिनेवा कन्वेंशन के तहत 194 देशों ने हस्ताक्षर किये थे।

इस संधि के तहत युद्धबंदियों के अधिकार तय किये गये हैं। युद्धबंदियों के खिलाफ मुकदमा भी इन्ही तय नियमों के मुताबिक चलाया जा सकता है तथा युद्धबंदियों को वापस लौटाना भी पड़ता है।

भारत और पाकिस्तान ने भी जिनेवा कन्वेंशन के नियमों का पालने करने हेतु हस्ताक्षर किये थे। दुनियाभर के अधिकतर देश इस कन्वेंशन का सम्मान करते हैं।

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय पायलट नचिकेता को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था। इस मामले को जिनेवा संधि के तहत उठाया गया था। तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया और पाकिस्तान सरकार ने नचिकेता को सकुशल स्वदेश वापस छोड़ा।

चर्चा में क्‍यो?

वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के मध्य बहुत ही जटिल स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों में तना-तनी का माहौल है। हाल ही में 14 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के आंतकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने भारत के सीआरपीएफ जवानों के काफिले में आईईडी से घातक हमला करवाया था जिसमें भारत के 44 जाबाज सैन्य सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गये। भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान की धरती में पल रहे आतंक को खत्म करने के लिक 12 मिराज 2000 एयरक्राफ्ट से तकरीबन 1000 किलोग्राम के बम आतंकी कैंपों में गिराये जिसमें तकरीबन 300 आतंकी ढेर कर दिये गये हैं।

भारत की इस कार्यवाही के बाद से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। जिसके चलते पाकिस्तान की एयरफोर्स ने भारत में घुसकर हमला करना चाहा परन्तु भारतीय सेना की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद उन्हे वापस जाना पड़ा। इस दौरान भारतीय सैन्य ने पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया। हालांकि इसमें भारत का मिग-21 विमान भी हमले का शिकार हुआ। पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पायलट ‘अभिनंदन बर्धमान’ हिरासत में ले लिया है।

भारत का लापता पायलट अभिनंदन बर्धमान पाकिस्तानी सेना के कब्जे में है। जिसको वापस लाने के लिये भारत जेनेवा समझौता का उपयोग कर रहा है तथा पाकिस्‍तान को जेनेवा समझौते का उल्‍लंघन न करने के लिये अन्‍तर्राष्‍ट्रीय दबाव भी बना रहा है। 

इस समझौते के तहत भारतीय विंग कमांडर अभिनन्‍दन वर्धमान जल्‍द ही पाकिस्‍तान से रिहा होंगे।