जर्मनवॉच ने जलवायु जोखिम सूचकांक 2019 जारी की

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हाल ही में एक स्वतंत्र विकास संगठन जर्मनवॉच ने जलवायु जोखिम सूचकांक-2019 जारी किया है जिसमें भारत को पिछले 20 वर्षों की जलवायु संबंधी घटनाओं पर 14वें स्थान पर रखा गया है। यह सूचकांक मौत और आर्थिक नुकसान के मामले में मौसमी घटनाओं (तूफान, बाढ़, भयंकर गर्मी इत्यादि) के मात्रात्मक प्रभावों का विश्लेषण करता है।

इस सूचकांक में भारत को उनके चार अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति प्रदान की गई है। इस सूचकांक की रिपोर्ट मुताबिक इस रैंकिंग में भारत के पड़ोसी देशे म्यांमार को तीसरा स्थान प्रदान किया गया है, बांग्लादेश को 7वां और पाकिस्तान को आठवां स्थान तथा नेपाल को ग्यारहवां स्थान प्रदान किया गया है। जर्मनवाच द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट के माध्यम से पता चलता है कि भारत के ये चार पड़ोसी देश सर्वाधिक मौसम की चपेट में क्यों रहते हैं और अत्यधिक जोखिम उठाना पड़ता है।

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1998 से 2017 के मध्य भारत में कुल 73,212 लोगों की मौत मौसमी घटनाओ के चलते हुई है। और इसी समयावधि में भारत में मौसमी घटनाओं में होने वाली मृत्युओं की वार्षिक औसत संख्या 3660 थी। जबकि भारत के पड़ोसी देश मौत की संख्या 7,048 के बाद दूसरी सर्वाधिक औसत संख्या है।

इस रिपोर्ट में वर्ष 2017 में इन देशों में हुई भारी बारिस के चलते लगभग 4 करोड़ जनसंख्या को प्रभावित होने की बात कही गई है जिसमें 1200 लोगों को मौत भी हुई है।

भारत का एक और पड़ोसी देश श्रीलंका भारत की अपेक्षा अच्छी स्थिति पर है जहां उसे इस रिपोर्ट में 31वीं रैंक प्रदान की गई है। हालांकि वर्ष 2017 में भारी वर्षा और भूस्खलन के चलते श्रीलंका में लगभग 200 मौते हुई हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1998 से लेकर 2017 के मध्य दुनियाभर में मौसमी घटनाओं एवं भारी बारिस तथा भूस्खलन के चलते 5,26,000 लोगों की मौत हुई है।