चीन एफएटीएफ का उपाध्यक्ष बना

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चीन आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय सहायता और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का उपाध्यक्ष चुना गया है। चीन को पेरिस में 37 देशों वाले एफएटीएफ की बैठक में उपाध्यक्ष चुना गया है। भारत ने उम्मीद जताई कि बीजिंग संगठन के उद्देश्य को संतुलित और वस्तुनिष्ठ तरीके से कायम रखेगा और उसे समर्थन देगा। एफएटीएफ एक वैश्विक निकाय है जिसपर आतंक के वित्तपोषण से लड़ने की जिम्मेदारी है।

मुख्य तथ्य:

  • एफएटीएफ ने पेरिस में अपनी पूर्ण बैठक में आतंक के वित्तपोषण और धन शोधन से लड़ने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की लेकिन पाकिस्तान को आतंक के वित्तपोषण करने वाले देशों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी सूची में नहीं डाला।
  • इस्लामाबाद को पाकिस्तान से गतिविधियां चला रहे आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई योजना तैयार करने हेतु उसे जून तक की मोहलत दी।
  • चीन पाकिस्तान का सदाबहार सहयोगी है। उसने संयुक्त राष्ट्र में जेईएम प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के भारत, अमेरिका तथा ब्रिटेन के प्रयासों की राह में बार-बार रोड़ा अटकाया है।
  • एफएटीएफ ने 23 फरवरी 2018 को अपनी रिपोर्ट में नौ देशों को ‘रणनीतिक कमियों’ वाला देश नामित किया। इनमें इराक, सीरिया, यमन और ट्यूनीशिया शामिल हैं।
  • पाकिस्तान 2012 से 2015 तक एफएटीएफ की ‘भूरी सूची’ में शामिल था।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ):

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) को वर्ष 1989 में स्थापित किया गया था। ये संस्था आतंकवाद से जुड़े मनी लांडरिंग से निपटने का कार्य करती आ रही थी। लेकिन वर्ष 2001 में इसके कार्य में विस्तार किया गया।

अब एफएटीएफ किसी भी देश के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंध जैसी कार्रवाई कर सकती है। एफएटीएफ 37 देशों का वैश्विक संगठन है जो अवैध धन को वैध बनाने तथा आतंकी कार्रवाई गतिविधियों को धन उपलब्ध कराने की निगरानी करता है।