चिन्नार वन्यजीव अभ्यारण्य में पहली बार श्रीलंकाई फ्रॉगमाउथ पक्षी देखा गया

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केरल के चिन्नार वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में श्रीलंकन प्रॉगमाउथ (Srilankan Frogmouth) नामक एक दुर्लभ पक्षी देखा गया है जिसके बाद से यह पक्षी विज्ञानियों की रुचि का विषय बना हुआ है।

अब तक श्रीलंकाई फ्रॉगमाउथ, बात्रकोस्टोमस मोनोलाइगर को पश्चिमी घाट के पश्चिमी हिस्सा में ही देखा जाता रहा है किंतु पहली बार इसे पश्चिमी घाट के पूर्वी हिस्सा में भी देखा गया है। आरंभ में इसे नाइटजर समझा गया परंतु निकट अवलोकन के पश्चात इसके श्रीलंकाई फ्रॉगमाउथ होने की पुष्टि हुई।

यह यूरोप एवं शीतोष्ण एशिया में प्रजनन करने वाले सायंकालीन और रात्रिचर पक्षी, नाइटजार (Nightjar) का संबंधी माना जाता है। नाइटजार पक्षी की तरह यह पक्षी भी कीड़ों को खाता है एवं मुख्यत: रात के समय ही शिकार की तलाश करता है।

इस पक्षी की मुख्य विशेषता यह है कि अप्रैल-मई के मेटिंग सीज़न के बाद यह एक साल में एक ही अंडा देता है। अंडा से बच्चा के निकलने के पश्चात नर फ्रागमाउथ घोसला को नष्ट कर बच्चे के साथ उड़ जाता है। इसका घोंसला मॉस, लाइकेन और मुलायम पौधों की पत्तियों तथा पेड़ की छाल की मदद से तैयार होता है। पक्षी विज्ञानियों के अनुसार, श्रीलंका में इस पक्षी का अनूठा आवास पाया जाता है।