ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स में भारत को 103वां स्थान

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स (वैश्विक मानव पूंजी सूचकांक) में भारत 103वें स्थान पर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने 130 देशों की सूची जारी की है।

सूची में ब्रिक्स देशों में रूस सबसे आगे है। उसे 16वीं रैंक प्रदान की गई है। चीन को 34वीं, ब्राजील को 77वीं और साउथ अफ्रीका को 87वीं रैंक हासिल हुई।
ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स में नॉर्वे ने टॉप पर जगह बनाई है और इस देश ने पिछले बार के टॉप पर बरकरार फिनलैंड को दूसरे स्थान पर कर दिया। दक्षिण एशियाई देशों में भारत, श्रीलंका और नेपाल से भी नीचे के पायदान पर है किन्तु पाकिस्तान और बांग्लादेश से ऊपर है। सूचकांक में भारत के पिछड़ने की वजहें भी स्पष्ट की गई हैं। जैसे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा होना और ह्यूमन कैपिटल का कम फैलाव होना। भारत के इस सूची में नीचे रहने का कारण यहां उपलब्ध कौशल का बेहतर इस्तेमाल न हो कर पाना है।

भविष्य में स्किल्स के डेवलपमेंट के मामले में भारत की स्थिति बेहतर है और इस मामले में 130 देशों के बीच इसकी रैंक 65 है. फोरम ने पिछले साल की अपनी रिपोर्ट में भारत को 105वीं रैंक दी। उस समय यह भी स्पष्ट किया गया कि यह देश अपनी ह्यूमन कैपिटल की संभावनाओं का सिर्फ 57 फीसद ही इस्तेमाल कर पा रहा है। उस सूची में फिनलैंड टॉप पर था।

                                 

वैश्विक मानव पूंजी सूचकांक:

  • यह इंडेक्स इस बात का संकेत होता है कि कौन-सा देश अपने लोगों के विकास, उनकी टीचिंग-ट्रेनिंग और टैलेंट के प्रयोग में कितना आगे है। न्यूज एजेंसी के अनुसार जेनेवा के डब्ल्यूईएफ (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इम्प्लॉयमेंट में जेंडर गैप के मामले में भी भारत दुनिया में सबसे पीछे है।
  • सूचकांक किसी देश के लोगों की नॉलेज और स्किल के आधार पर तैयार की जाती है।
  • यह ग्लोबल इकोनॉमिक सिस्टम में उस देश की वैल्यू को स्पष्ट करती है और उसकी ह्यूमन कैपिटल रैंक भी तय करती है।